Naresh Bhagoria
6 Jan 2026
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6 Jan 2026
नई दिल्ली/अहमदाबाद। सोमनाथ मंदिर, गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित, भारतीय आस्था और सभ्यता का शाश्वत प्रतीक है। यह मंदिर बार-बार विदेशी आक्रमणों और विध्वंस का सामना कर चुका है, लेकिन हर बार इसे पुनर्निर्मित किया गया और अपनी भव्यता में फिर से जीवंत हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने ब्लॉग में सोमनाथ की 1000 साल पुरानी गाथा साझा की। जिसमें उन्होंने इसके आध्यात्मिक महत्व, बार-बार हुए आक्रमण और स्वतंत्र भारत में इसके पुनर्निर्माण की प्रेरक कहानी का वर्णन किया। यह मंदिर न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी सभ्यता, शक्ति और आत्मविश्वास का स्थायी प्रतीक भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर की 1000 साल पुरानी गाथा को साझा किया। उन्होंने लिखा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का शाश्वत प्रतीक है। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित यह मंदिर, हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले आता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में इसका वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है:
"सौराष्ट्रे सोमनाथं च…", जिसका मतलब है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख स्थान रखता है।
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि सोमनाथ के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों में कहा गया है:
"सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते। लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥"
इस प्रकार, सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता और श्रद्धालुओं के जीवन में इसका महत्व अतुलनीय है।

सोमनाथ मंदिर ने इतिहास में कई बार विध्वंस देखा। पहला और सबसे बड़ा आक्रमण 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने किया। उन्होंने मंदिर के पवित्र ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया और इसे लूट लिया। इसके बाद कई अन्य आक्रांताओं ने भी इस मंदिर को निशाना बनाया, जैसे:
अलाउद्दीन खिलजी (1299)
जफर खान (1395)
औरंगजेब (1706)
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि ये आक्रमण केवल धार्मिक स्थलों के विनाश के लिए नहीं थे, बल्कि हमारे समाज और सभ्यता को कमजोर करने का प्रयास भी थे। हर बार जब मंदिर पर हमला हुआ, तब हमारे पूर्वजों ने इसे पुनर्निर्मित किया और इसे फिर से जीवंत बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तार से बताया कि वर्ष 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ पर हमला किया, और इसके परिणामस्वरूप करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास पर चोट लगी। इतिहास के कई स्रोत बताते हैं कि इस आक्रमण में क्रूरता के अद्भुत उदाहरण मिलते हैं। पढ़ने पर आज भी हृदय कांप उठता है।
सोमनाथ का आध्यात्मिक और आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा था। यह मंदिर बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता था। समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव और महिमा की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।
पीएम मोदी ने लिखा कि इन हमलों के बावजूद सोमनाथ मंदिर केवल विध्वंस का प्रतीक नहीं है। यह भारत माता के करोड़ों संतानों के स्वाभिमान और अटूट आस्था की गाथा है।

स्वतंत्रता के बाद, सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में किया गया। 1947 में दीवाली के समय सरदार पटेल ने इस मंदिर का दौरा किया और इसे पुनर्निर्मित करने का संकल्प लिया।
11 मई 1951 को मंदिर का भव्य उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ। पीएम मोदी ने लिखा कि यह दिन सरदार पटेल के सपनों का साकार रूप था। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस समारोह में उत्साहित नहीं थे और उन्होंने इसे भारत की छवि के लिए हानिकारक बताया। लेकिन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अडिग रहते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाया।
सोमनाथ पर किसी भी चर्चा में के.एम. मुंशी के योगदान को याद किए बिना बात अधूरी है। उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’ में उन्होंने मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को बताया। पीएम मोदी ने लिखा कि भले मंदिर का भौतिक स्वरूप नष्ट हो गया हो, लेकिन इसकी चेतना और आस्था अमर रही।

पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में उल्लेख किया कि 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे। यह अनुभव उन्हें भीतर तक प्रभावित कर गया। उन्होंने 1897 में चेन्नई में अपने व्याख्यान में कहा कि सोमनाथ और दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर हमारे लिए अनगिनत ज्ञान के पाठ सिखाते हैं।
इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसे पुनर्जीवित किया गया। यह दर्शाता है कि हमारी सभ्यता में नष्ट होने के बाद भी उठ खड़े होने की ताकत है।
पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ हमें यह सिखाता है कि आस्था और सृजन की शक्ति हमेशा विनाश और घृणा से मजबूत रहती है। आक्रमणकारी और उनके समय की बर्बरता इतिहास के पन्नों में केवल फुटनोट बनकर रह गए, जबकि सोमनाथ आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यदि हजार साल पहले खंडित सोमनाथ अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम आज भी एक समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने लिखा कि आज सोमनाथ न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और वैश्विक दृष्टि से भी महत्व रखता है। यह भारत की कला, संगीत, पर्व, योग और आयुर्वेद की वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है।
सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कठिनाई और बाधाओं के बावजूद विश्वास, आस्था और संकल्प से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह हमारे युवाओं, संस्कृति और सभ्यता को प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य भी सोमनाथ आए थे। उन्होंने कहा कि जिस परम तत्व में सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं, वह हमारी आत्मा को शांति और ठहराव प्रदान करता है।
आज भी सोमनाथ के दर्शन से श्रद्धालु और आम लोग एक अलौकिक अनुभव महसूस करते हैं। समुद्र की लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठ खड़ा हुआ और गर्जना करता रहा।
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