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ये हैं मेघालय का सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रैक :बांस से तैयार, 3 हजार सीढ़ियों का सफर नहीं है आसान

इस ट्रैक का असली आकर्षण इससे जुड़ी वह प्राचीन लोककथा है, जो खासी जनजाति की मान्यताओं और परंपराओं से निकलकर आती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘यू मावरिंगखांग’ केवल एक विशाल चट्टान नहीं था, बल्कि वह पत्थरों का राजा माना जाता था।
बांस से तैयार, 3 हजार सीढ़ियों का सफर नहीं है आसान
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    एडवेंचर और प्रकृति के रोमांच को पसंद करने वालों के लिए मेघालय किसी जन्नत से कम नहीं है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां एक ऐसा खतरनाक रास्ता भी है, जिसे देश के सबसे जोखिमभरे ट्रैक्स में गिना जाता है। हम बात कर रहे हैं ‘यू मावरिंगखांग बांस ट्रैक’  की, जो रोमांच और डर दोनों का शानदार अनोखा एक्सपीरियंस देता है।

     3 हजार सीढ़ियों का रास्ता

    यह ट्रैक कोई साधारण रास्ता नहीं, बल्कि पूरी तरह बांस से तैयार किया गया इंजीनियरिंग का एक अनोखा नमूना है। एडवेंचर के शौकीनों के लिए यू मावरिंगखांग बांस ट्रैक किसी चुनौती से कम नहीं है। इस ट्रैक पर चलने के दौरान सैलानियों को लगभग 3,000 सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं, जो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परीक्षा लेती हैं।

    कितने घंटे में पूरा होता है सफर?

    इस ट्रैक को पूरा करने में आमतौर पर 3 से 5 घंटे का समय लग जाता है, जो ट्रेकर की फिटनेस और मौसम पर भी निर्भर करता है। यू मावरिंगखांग बांस ट्रैक पर सुरक्षा को लेकर खास सतर्कता बरती जाती है।

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    यहां एक सख्त नियम है कि बांस के पुलों पर एक साथ ज्यादा लोगों को चलने की अनुमति नहीं होती। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बांस के ढांचे पर अधिक भार न पड़े और किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। यही वजह है कि यह ट्रैक रोमांचक होने के साथ-साथ अनुशासन और सावधानी की भी परीक्षा लेता है।

    अक्टूबर से मार्च का महीना परफेक्ट सीजन

    मेघालय अपनी भारी बारिश के लिए मशहूर है, लेकिन यू मावरिंगखांग बांस ट्रैक पर बारिश का मौसम खतरे की घंटी है। फिसलन और तेज बहाव के खतरे को देखते हुए यहां जाने का सबसे बेस्ट समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस अवधि में मौसम सुहावना रहता है और ट्रैक पर चलने के लिए बेहतर पकड़ मिलती है, जिससे रोमांच सुरक्षित तरीके से लिया जा सकता है।

    जनजाति परंपरा से जुड़ा है गहरा नाता

    इस ट्रैक का असली आकर्षण इससे जुड़ी वह प्राचीन लोककथा है, जो खासी जनजाति की मान्यताओं और परंपराओं से निकलकर आती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘यू मावरिंगखांग’ केवल एक विशाल चट्टान नहीं था, बल्कि वह पत्थरों का राजा माना जाता था। इसी अमर कथा ने इस ट्रैक को सिर्फ एक एडवेंचर रूट नहीं, बल्कि रहस्य और संस्कृति से जुड़ा एक खास स्थल बना दिया है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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