इस प्लांट के शुरू होने से भारत का फोकस अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनने पर भी साफ नजर आ रहा है। सरकार लगातार इस सेक्टर में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है।
प्रधानमंत्री ने साणंद में इस नए प्लांट के उद्घाटन के साथ यह साफ किया कि गुजरात अब सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इससे पहले भी यहां माइक्रोन प्लांट में प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, जिससे यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इसी के साथ लगातार मिल रही इन उपलब्धियों से भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग यात्रा को मजबूती मिल रही है।
केयन्स टेक्नोलॉजी के इस प्लांट में इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल का निर्माण किया जाएगा, जो खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों और औद्योगिक उपयोग में काम आएंगे। इस उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाएगा, जिससे भारत की ग्लोबल सप्लाई चेन में हिस्सेदारी और मजबूत होगी। इससे देश की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट क्षमता को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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बता दें कि सरकार ने 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया था, जिसके तहत देश के छह राज्यों में 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की 10 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत खुद को एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में स्थापित कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं आई हैं।
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प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार फिलहाल करीब 50 अरब डॉलर का है, जो इस दशक के आखिर तक 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रही है। साथ ही 'ध्रुव 64' जैसे स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर और हजारों प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग से देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।