भोपाल। ईरान-इजराइल जंग के बीच देशभर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता का असर अब मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। राजधानी भोपाल में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें सामने आने के बाद लोगों में घबराहट बढ़ गई है। बुधवार देर रात करीब 1:30 बजे बैरसिया रोड, सब्जी मंडी रोड करोंद, 80 फीट रोड और हाउसिंग बोर्ड स्थित पेट्रोल पंपों पर बड़ी संख्या में लोग ईंधन भरवाने के लिए पहुंच गए।
दरअसल, शहर के 2 से 3 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने की सूचना फैलते ही लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग अपनी गाड़ियों में फुल टैंक कराने लगे, जिससे कुछ पंपों पर अस्थायी दबाव बढ़ गया। हालात ऐसे बने कि रात में भी कई पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। जिसमें दो- पहिया सहित चार पहिया और कई ऑटो रिक्शा भी ईंधन भरवाने पंप पर पहुंचे।
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हालांकि, जिला प्रशासन ने स्थिति को लेकर साफ किया है कि भोपाल में किसी तरह का ईंधन संकट नहीं है। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के मुताबिक शहर में कुल 58.79 लाख किलोलीटर (करीब 58.8 करोड़ लीटर) पेट्रोल और डीजल का स्टॉक उपलब्ध है, जो अगले ढाई से तीन महीने तक की जरूरतों के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने बताया कि भोपाल के पास भौंरी क्षेत्र में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बड़े डिपो मौजूद हैं, जहां से शहर के करीब 192 पेट्रोल पंपों को नियमित सप्लाई की जाती है। शहर में प्रतिदिन लगभग 12 लाख लीटर डीजल और 9 लाख लीटर पेट्रोल की आपूर्ति होती है, जो सामान्य खपत के हिसाब से पर्याप्त है।
करोंद सब्जी मंडी में पेट्रोल- डीजल भरवाने के लिए कई टू- व्हीलर्स पहुंचे

हाउसिंग बोर्ड पेट्रोल पंप में भी हड़कंप में लोगों ने अपनी गाड़ियों में ईंधन भरवाया
बैरसिया रोड स्थित पंपों पर कई कारें भी पेट्रोल- डीजल भरवाने देर रात पहुंची

वहीं, मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन ने भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। एसोसिएशन के अनुसार, करीब 5 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर एडवांस पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों के कारण अस्थायी रूप से सप्लाई प्रभावित हुई है, न कि ईंधन की वास्तविक कमी के कारण। हालांकि लोगों ने गलत अफवाहों पर भरोसा करके जल्दबाजी में ईंधन भरवाने देर रात पहुंचे।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के मुताबिक ही पेट्रोल-डीजल भरवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि घबराहट में की गई अतिरिक्त खरीदारी ही ऐसी स्थिति को गंभीर बना सकती है, जबकि वास्तविकता में सप्लाई फिलहाल पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।