सिटी बस सर्विस :डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाने में देरी, भोपाल-इंदौर में जुलाई से, अन्य शहरों में अगस्त से चलेंगी लोकल बस

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश के भोपाल और इंदौर महानगरों में जुलाई से पीएम-ई बस चलना शुरू हो जाएंगी। बाकी के शहरों में अगस्त तक संभावना है। परिवहन विभाग ई-टिकिटिंग के लिए निविदा भी जारी कर दी है और एजेंसी तय होने के बाद बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। भोपाल व इंदौर में शुरुआती दौर पर 50-50 बसें संचालित होंगी। हालांकि भोपाल, इंदौर,जबलपुर, ग्वालियर, सागर और उज्जैन में बसों के संचालन के लिए भारत सरकार ने ऑपरेटर तय कर दिया है। ऑपरेटर ने निकायों को बसें देने के लिए भी सहमति दे दी है, डिपो तैयार होने के बाद अनुबंध होगा। बसों को 56 और 58 रुपए प्रति किमी के मान से भुगतान किया जाएगा। इन बसों को शहर के अंदर 200 किमी तक हर दिन चलना आवश्यक होगा। कई शहरों में अभी काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। देखा गया की सागर में केवल 20 प्रतिशत काम हुआ है और फिलहाल भूमि समतलीकरण की प्रक्रिया जारी है।
डिपो का सिर्फ 60% काम पूरा
प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तैयार की जा रही अधोसंरचना तय समय-सीमा से काफी पीछे चल रही है। कई स्थानों पर केवल विद्युत लाइन बिछाने तक ही काम सीमित है, जबकि ट्रांसफॉर्मर स्थापना और चार्जिंग पॉइंट लगाने का कार्य अधूरा पड़ा है। निकायों की औसत प्रगति देखें तो एक साल में 60 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उज्जैन, इंदौर सहित कई निकायों में कार्य पूर्ण करने में दो से पांच माह का समय और लगेगा।
भोपाल सहित तीन शहर आगे
- ग्वालियर के रमौआ डिपो में चार्जिंग पॉइंट और विद्युत कार्य 70 प्रतिशत से अधिक पूरा।
- ग्वालियर के ही आईएसबीटी परिसर और जबलपुर के करौंदा बस डिपो में करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हुआ है।
- भोपाल के बैरागढ़ के चार्जिंग स्टेशन का काम भी 90 प्रतिशत पूरा हो गया है।
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उज्जैन में जमीन तय नहीं
सतना और कटनी में नए चार्जिंग स्टेशन और डिपो के लिए जगह फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं सिंहस्थ तैयारियों के चलते उज्जैन में अब तक स्थान चयन नहीं हो पाया है।
हमें नगर बसें चलने का बेसब्री से इंतजार
पिछले दो साल से भोपाल की शहरी परिवहन सेवा ठप है। लाल बसें भी 80 फीसदी कम हो गई हैं, सड़कों पर एक-दो बसें ही दिखाई देती हैं, वह भी प्राइम सड़कों पर चलती है। शहर का पूरा लोक परिवहन आटो, ई-रेक्शा और निजी वाहनों पर आश्रित है। हमें नगर बसें चलने का बेसब्री से इंतजार है।
प्रमिला शुक्ला, कोलार भोपाल
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इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा तभी लोगों को मिलेगी सुविधा
निकायों को ईवी के लिए डिपो और चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। निकाय जितनी जल्दी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लेंगे उतनी जल्दी लोगों को बस सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। सरकार का प्रयास है कि दो-तीन माह के अंदर सभी बड़े शहरों में ई-बसों का संचालन शुरू कर दिए जाए।
संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग












