ट्रंप ने जवाब बताया ‘अस्वीकार्य’!ईरान ने ठुकराया ट्रंप का शांति प्रस्ताव, युद्ध के नुकसान का मांगा हिसाब!

वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की तरफ से भेजे गए जवाब को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसका जवाब ईरान ने पाकिस्तान के जरिए दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने युद्ध रोकने के बदले कई बड़ी शर्तें रखीं। इनमें युद्धविराम, हमलों की गारंटी, आर्थिक प्रतिबंध हटाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की Sovereignty को मान्यता देने जैसी मांगें शामिल हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इन मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
ईरान ने रखीं कई बड़ी शर्तें
ईरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने सबसे पहले तत्काल युद्धविराम की मांग की है। ईरान चाहता है कि अमेरिका यह लिखित गारंटी दे कि भविष्य में उस पर कोई नया हमला नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी उठाई है। ईरान का कहना है कि हालिया संघर्ष में उसकी सैन्य और आर्थिक व्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई अमेरिका और उसके सहयोगियों को करनी चाहिए।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने अधिकार को औपचारिक मान्यता देने की मांग भी रखी है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में माना जाता है।
तेल प्रतिबंध हटाने की भी मांग
ईरान ने अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC से मांग की है कि कम से कम 30 दिनों के लिए ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं। तेहरान का कहना है कि अगर प्रतिबंधों में राहत नहीं दी गई, तो किसी भी शांति समझौते पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा। ईरान ने समुद्री नाकेबंदी हटाने और उसके बंदरगाहों पर लगी रोक खत्म करने की मांग भी रखी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता है कि युद्ध रुकने के बाद 30 दिनों तक बातचीत जारी रहे, ताकि आगे के समझौते पर विस्तार से काम किया जा सके।
ट्रंप ने कहा- मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाब पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि उन्होंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और यह उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया। ट्रंप ने कहा कि ईरान का रवैया अमेरिका के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से दुनिया को सिर्फ टालने और गुमराह करने की कोशिश करता रहा है।
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ओबामा पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने इस पूरे मामले में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओबामा की नरम नीतियों की वजह से ही ईरान को दोबारा मजबूत होने का मौका मिला। ट्रंप ने दावा किया कि ओबामा प्रशासन ने इजरायल और दूसरे सहयोगी देशों को नजरअंदाज किया और ईरान के प्रति नरम रुख अपनाया। इसी का फायदा उठाकर ईरान ने अपनी ताकत बढ़ाई।
ईरान को दी नई चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले दो हफ्तों में ईरान के बाकी बचे सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने लगभग 70 प्रतिशत सैन्य लक्ष्य पूरे कर चुका है। ट्रंप के मुताबिक, अगर जरूरत पड़ी तो बाकी ठिकानों पर भी तेजी से कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।
पाकिस्तान बना दोनों देशों के बीच मध्यस्थ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पाकिस्तान के जरिए जारी है। दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क की बजाय लिखित संदेशों के जरिए संवाद हो रहा है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में दोनों पक्षों की बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है।
पीछे हटने को तैयार नहीं ईरान
अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, ईरान सीमित समय के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार है। हालांकि उसने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु ठिकानों को खत्म नहीं करेगा। ईरान ने 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने की बात को बहुत लंबा समय बताया है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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कैसे शुरू हुआ था यह संघर्ष?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। लगातार कई हफ्तों तक चले हमलों के बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्ष अस्थायी सीजफायर पर राजी हुए। इसके बाद से स्थायी युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अब ट्रंप द्वारा ईरान के जवाब को खारिज किए जाने के बाद हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं।











