PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत!रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के PM, बिलावल ने भी लगाई फटकार

पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बीच राजनीतिक तनाव अब खुलकर सामने आने लगा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके बयान पर PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने सार्वजनिक तौर पर कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की है। मामला इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी रक्षा मंत्री की टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
इसी बीच PoK में पहले से जारी विरोध प्रदर्शन और पाकिस्तान सरकार पर लग रहे दमन के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा था?
विवाद की शुरुआत एक टीवी इंटरव्यू से हुई, जिसमें पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग असल कश्मीरी नहीं हैं। यह बयान सामने आते ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कई राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं ने इसे कश्मीरियों की पहचान का अपमान बताया।
PoK के प्रधानमंत्री का तीखा पलटवार
PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रक्षा मंत्री को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए पाकिस्तान के किसी मंत्री या किसी अन्य व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। राठौर ने कहा कि, वरिष्ठ नेताओं के ऐसे बयान लोगों को जोड़ने के बजाय समाज में विभाजन पैदा करते हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री से अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की।
'गलती छिपाने के लिए सरकार पर सवाल उठा रहे'
राठौर ने आरोप लगाया कि जब रक्षा मंत्री के बयान की आलोचना शुरू हुई तो उन्होंने मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए PoK सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि, अगर ख्वाजा आसिफ को PoK सरकार के कामकाज पर संदेह है तो वे पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से जानकारी ले सकते हैं। उनके अनुसार उनकी सरकार ने बेहतर काम किया है और उसे बलि का बकरा बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
बिलावल भुट्टो भी हुए नाराज
यह विवाद केवल PoK तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी संसद में रक्षा मंत्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से कहा कि, कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मंत्रियों को बेहद जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। बिलावल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को अपने मंत्रियों की बयानबाजी पर नियंत्रण रखना चाहिए।
आसिफ ने माफी से किया इनकार
विवाद बढ़ने के बावजूद ख्वाजा आसिफ अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि, उन्होंने पहले भी माफी नहीं मांगी थी और अब भी माफी नहीं मांगेंगे। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
PoK में पहले से जारी है बड़ा आंदोलन
राजनीतिक बयानबाजी के बीच पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई दिनों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी सस्ती बिजली, खाद्यान्न पर सब्सिडी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, पाकिस्तान सरकार उनकी मांगें सुनने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
सरकार पर दमन के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि, आंदोलन कमजोर करने के लिए कई इलाकों में खाद्यान्न, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई जगह इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, आवाजाही पर असर पड़ा है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ है और रोज कमाने वाले लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
128 सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई
प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में अब तक 128 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि, सेवानिवृत्त सैनिकों को भी प्रदर्शन से दूर रहने की चेतावनी दी गई है और उनकी पेंशन रोकने की धमकी तक दी जा रही है।
हिंसक झड़पों और गिरफ्तारियों के आरोप
विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की भी खबरें सामने आई हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि पाकिस्तान प्रशासन का कहना है कि, कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ की जा रही है।











