वो कहावत है न गरीबी में आटा गीला, कुछ ऐसा ही हाल इस समय पाकिस्तान का है। पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अब एक और बड़ा झटका लगा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को दिया गया 2 अरब डॉलर (करीब 16,500 करोड़ रुपए) का कर्ज वापस मांग लिया है। पहले से कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान पर यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव का असर अब आर्थिक फैसलों पर भी दिखने लगा है। ऐसे माहौल में UAE ने अपने पैसे वापस लेने का फैसला किया है, जिससे पाकिस्तान की परेशानी और बढ़ गई है।
दरअसल, UAE ने यह रकम पाकिस्तान के स्टेट बैंक (SBP) में जमा कर रखी थी। इसका मकसद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाना था। हर साल इस कर्ज की अवधि बढ़ा दी जाती थी, जिससे पाकिस्तान को तुरंत पैसे लौटाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
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लेकिन इस बार UAE ने साफ कह दिया है कि वह अब इस कर्ज की अवधि आगे नहीं बढ़ाएगा और महीने के अंत तक पूरा पैसा वापस चाहता है। इससे पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर पड़ने वाला है।
इस कर्ज पर पाकिस्तान करीब 6% का ब्याज दे रहा था, जो पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बोझ है। दिसंबर 2025 में इस कर्ज की अवधि खत्म हो चुकी थी, जिसे कुछ समय के लिए बढ़ाया गया था। अब UAE ने इसे और बढ़ाने से मना कर दिया है।
सिर्फ यही नहीं, पाकिस्तान को इस साल कुल 12 अरब डॉलर के कर्ज को भी मैनेज करना है। इसमें सऊदी अरब के 5 अरब डॉलर और चीन के 4 अरब डॉलर शामिल हैं। अगर ये देश भी पैसे वापस मांगते हैं, तो पाकिस्तान की हालत और खराब हो सकती है।
फिलहाल पाकिस्तान के पास करीब 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। यानी तकनीकी रूप से वह 2 अरब डॉलर लौटा सकता है। लेकिन इतनी बड़ी रकम एक साथ निकलने से उसके भंडार पर भारी असर पड़ेगा।
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आने वाले महीनों में पाकिस्तान को और भी कर्ज चुकाने हैं। ऐसे में उसे नए निवेश की जरूरत पड़ेगी या फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मदद मांगनी पड़ सकती है।
इस आर्थिक दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम खर्च को नियंत्रित करने और सीमित संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
हालांकि, आम जनता के लिए यह फैसला मुश्किलें बढ़ाने वाला है। महंगे ईंधन का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खेती और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है। सरकार ने कुछ राहत देने के लिए किसानों, बाइक चालकों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीमित सब्सिडी देने की बात कही है, लेकिन यह राहत काफी नहीं मानी जा रही है।
कर्ज चुकाने का दबाव और महंगे पेट्रोल-डीजल का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की पूरी संभावना है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और मुश्किल हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो पाकिस्तान को और कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
अब सबकी नजर पाकिस्तान की सरकार पर है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे इस आर्थिक संकट से देश को कैसे बाहर निकालते हैं।
अगर UAE के बाद अन्य देश भी अपने पैसे वापस मांगते हैं, तो पाकिस्तान के लिए हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले कुछ महीने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम साबित होंगे।