उत्तर प्रदेश ATS ने एक ऐसे खतरनाक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो देश में डर और अफरा-तफरी फैलाने की साजिश रच रहा था। इस ऑपरेशन में 4 युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर भारत में गजवा-ए-हिंद जैसे खतरनाक एजेंडे को अंजाम देने की तैयारी में थे।
जांच में सामने आया कि ये आरोपी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रकों में आग लगाकर बड़े स्तर पर तबाही मचाने की योजना बना रहे थे। उनका एक बड़ा टारगेट लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन भी था, जहां भीड़भाड़ के बीच आगजनी कर दहशत फैलाने की साजिश थी।
ATS को पहले से इनपुट मिला था कि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशी हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह एक पाकिस्तानी हैंडलर के लगातार संपर्क में था और उसी के निर्देशों पर काम कर रहा था।
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गिरोह का मुख्य काम देश के अहम ठिकानों और नेताओं की रेकी करना, उनकी जानकारी इकट्ठा करना और उसे पाकिस्तान भेजना था। इसके बाद उसी आधार पर हमले की साजिश रची जा रही थी।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी पहले छोटी-छोटी आगजनी की घटनाएं करते थे और उनका वीडियो बनाकर अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेजते थे।
इन वीडियो के बदले उन्हें QR कोड के जरिए पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। यानी दहशत फैलाना इनके लिए सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि कमाई का जरिया भी बन चुका था।
इस गिरोह का मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविड बताया जा रहा है, जिसे ATS ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ उसका गांव का साथी अरबाब भी इस नेटवर्क में शामिल था।
इन दोनों ने मिलकर विकास गहलावत उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित जैसे लोगों को जोड़ा, जो पैसों के लालच में इस साजिश का हिस्सा बन गए।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने गाज़ियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में कई महत्वपूर्ण जगहों की रेकी की थी।
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इनमें रेलवे सिग्नल बॉक्स, बड़े संस्थान और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल थे। इन सभी जगहों के वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर को भेजे गए थे, ताकि आगे की योजना बनाई जा सके।
ATS ने आरोपियों के पास से कई अहम चीजें बरामद की हैं, जिनमें ज्वलनशील पदार्थ, 7 मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और आधार कार्ड शामिल हैं। ये सभी चीजें इस बात का सबूत हैं कि गिरोह किसी बड़े हमले की तैयारी में था। पूरे मामले की जांच से साफ है कि इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य देश में भय और अस्थिरता का माहौल बनाना था। पाकिस्तानी हैंडलर्स इन आरोपियों को टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए निर्देश देते थे और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर रहे थे।
अगर समय रहते एटीएस कार्रवाई नहीं करती, तो यह साजिश देश के लिए एक बड़ी त्रासदी बन सकती थी। फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।