वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने साफ कहा कि, इन घटनाओं का ईरान के साथ जारी कूटनीतिक वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
एक मीडिया हाउस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, इन घटनाओं का बातचीत या कूटनीति पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ेगा। यह युद्ध है और हम युद्ध में हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एक तरफ मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास भी चल रहे हैं।
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप से दुर्घटनाग्रस्त विमानों से जुड़े सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में सवाल पूछा गया, लेकिन उन्होंने इस पर विस्तार से बात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील और जटिल है, इसलिए चल रहे सैन्य अभियानों के बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी देना सही नहीं होगा।
ट्रंप ने मीडिया कवरेज पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि, यह एक सक्रिय सैन्य अभियान है और इसे सनसनीखेज तरीके से पेश करने के बजाय समझदारी से कवर किया जाना चाहिए।
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मिडिल ईस्ट में शुक्रवार को अमेरिकी वायुसेना से जुड़े दो अलग-अलग विमान हादसे सामने आए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। पहली घटना में अमेरिकी वायुसेना का F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान ईरान के एयरस्पेस में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
ईरान ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस अमेरिकी विमान को मार गिराया। हालांकि अमेरिका की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस विमान में दो सदस्यीय चालक दल था-
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें से एक सदस्य को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
पहली घटना के कुछ समय बाद एक और अमेरिकी लड़ाकू विमान A-10 थंडरबोल्ट II के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई। यह हादसा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट के पास हुआ। मीडिया हाउस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से इस घटना की पुष्टि की है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि यह विमान तकनीकी खराबी से क्रैश हुआ या उसे मार गिराया गया। ईरान ने इस घटना को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई दावा नहीं किया है। वहीं विमान के पायलट की स्थिति को लेकर भी अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
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इन घटनाओं के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकी A-10 जमीनी हमलावर विमान को मार गिराया है। ईरान के अनुसार, यह विमान रणनीतिक जलमार्ग के आसपास उड़ान भर रहा था और उसे निशाना बनाकर गिराया गया।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस दावे पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। A-10 थंडरबोल्ट II विमान को विशेष रूप से ग्राउंड अटैक मिशन के लिए डिजाइन किया गया है और यह अमेरिकी वायुसेना के सबसे प्रभावी युद्धक विमानों में से एक माना जाता है।
अमेरिकी सेना ने जानकारी दी है कि, दुर्घटनाग्रस्त विमान से एक चालक दल के सदस्य को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह जीवित है और फिलहाल अमेरिकी सैन्य नियंत्रण में है। उसका मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है। हालांकि, दूसरे चालक दल के सदस्य को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह ईरान की हिरासत में हो सकता है, जबकि कुछ में बताया गया है कि उसकी तलाश अभी भी जारी है। अमेरिकी सेना ने इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरान के ऊपर किसी अमेरिकी विमान को गिराए जाने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि, दुर्घटनास्थल से मिले फुटेज में विमान के टुकड़े और टेल फिन दिखाई दिए हैं, जिन पर 494वें फाइटर स्क्वाड्रन का चिन्ह देखा गया। यह स्क्वाड्रन ब्रिटेन के आरएएफ लेकनहीथ एयरबेस से ऑपरेट करता है। हालांकि, इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
ट्रंप ने भले ही इन घटनाओं का कूटनीतिक वार्ता पर असर न पड़ने की बात कही हो, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स इसके विपरीत संकेत दे रही हैं। अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष रोकने के लिए चल रही बातचीत फिलहाल ठप पड़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, कई देशों की मध्यस्थता के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच इस्लामाबाद में एक संभावित बैठक की योजना बनाई जा रही थी। लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होगा। तेहरान का कहना है कि, अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तें स्वीकार्य नहीं हैं। इस कारण युद्धविराम को लेकर चल रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में फिलहाल दो समानांतर प्रक्रियाएं चल रही हैं। एक तरफ सैन्य संघर्ष तेज होता जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिशें भी जारी हैं। ट्रंप का बयान भी इसी रणनीति को दर्शाता है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है।
मिडिल ईस्ट पहले से ही दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक जलमार्ग के आसपास सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। दुनिया भर के देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।