होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर बढ़ा तनाव:230 तेल टैंकर फंसे, UAE और EU ने जताई सख्त आपत्ति

अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम के बावजूद पश्चिम एशिया में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट पर खड़े इस विवाद ने अब अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।
230 तेल से भरे जहाज फंसे, सप्लाई पर असर
संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि करीब 230 तेल से लदे जहाज इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के इंतजार में खड़े हैं। यह स्थिति ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई के लिए गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यह मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल पहुंचाने का मुख्य जरिया है।
ये भी पढ़ें: सीजफायर का श्रेय लेने की होड़: ईरान जंग पर खुद की वाहवाही में डूबा पाकिस्तान,अब उठी नोबेल शांति पुरस्कार की मांग
ईरान के रुख पर UAE का कड़ा विरोध
यूएई ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपनी शर्तें लागू करे। सुल्तान अल-जाबेर ने कहा कि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक और शर्त के होनी चाहिए। अगर किसी देश की अनुमति और दबाव पर जहाज गुजरेंगे तो यह नौवहन की आजादी नहीं बल्कि मजबूरी मानी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते का इस्तेमाल “हथियार” की तरह करना बिल्कुल स्वीकार नहीं है।
EU ने भी जताई नाराजगी
इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता अनवर अल अनुनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक समुद्री रास्तों पर बिना किसी शुल्क या टैक्स के आवाजाही की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने इसे ग्लोबल हित से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि इसे हर हाल में सुरक्षित और खुला रखा जाना जरूरी है।
ये भी पढ़ें: इस्लामाबाद शांति वार्ता पर संकट! ईरान के राजदूत ने डिलीट किया पोस्ट, यूरेनियम पर फंसा पेंच; सीजफायर पर बढ़ा सस्पेंस
कई मायनों में महत्वपूर्ण है यह रास्ता
- दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है
- एशिया, यूरोप और अन्य देशों के लिए ऊर्जा सप्लाई की मुख्य कड़ी
- यहां रुकावट का असर सीधे तेल की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है












