
तेजी से बदलती तकनीक अब सिर्फ सहूलियत ही नहीं, बल्कि खतरे भी लेकर आ रही है। इसी कड़ी में क्लॉड मिथॉस का नाम सामने आया है। इस एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को लेकर भारत सरकार अलर्ट हो गई है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के बड़े और वित्तीय संस्थानों के साथ एक बैठक की, जिसमें इस AI से पैदा होने वाले संभावित साइबर खतरों पर विस्तार से चर्चा हुई।
'क्लॉड मिथॉस' को AI कंपनी Anthropic ने बनाया है। इसे अब तक सबसे ताकतवर AI मॉडल्स में माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यह ऐसे तकनीकी कमजोरियों को भी पकड़ सकता है, जो सालों से सिस्टम में छिपी हुई हैं और इंसानों को नजर नहीं आईं। यही इसकी खासियत है, लेकिन यही सबसे बड़ा खतरा भी बन सकती है। अगर यह तकनीक गलत लोगों के हाथ लग गई, तो हैकर्स इसका इस्तेमाल करके बैंकिंग सिस्टम, डेटा नेटवर्क और दूसरे डिजिटल सिस्टम में आसानी से सेंध लगा सकते हैं।
Anthropic ने इस मॉडल का एक्सेस बेहद सीमित रखा है। इसे केवल चुनिंदा बड़ी टेक कंपनियों- जैसे Google, Microsoft और Amazon को ही दिया गया है। लेकिन रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि कुछ अनधिकृत लोगों तक भी इसकी पहुंच बन गई है। यही बात सरकार और वित्तीय संस्थानों की चिंता को और बढ़ा रही है। क्योंकि अगर यह टूल साइबर अपराधियों के हाथ लग गया, तो वे आसानी से सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं।
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इस AI मॉडल से जुड़ी एक घटना ने इसे लेकर डर और भी गहरा कर दिया है। टेस्टिंग के दौरान ‘क्लॉड मिथॉस’ को एक सुरक्षित सैंडबॉक्स में रखा गया था, यानी ऐसी जगह जहां वह इंटरनेट से जुड़ ही नहीं सकता था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस AI ने खुद ही उस सुरक्षा घेरा पार कर लिया। बाद में एक रिसर्चर को उसी AI की तरफ से ईमेल भी मिला। इसका पता तब चला जब इस पर काम करने वाले एक रिसर्चर को अचानव उसी एआई मॉडल का भेजा हुआ एक ईमेल मिला। एआई का इस तरह अपनी मर्जी से बाहर निकलना बेहद खतरनाक है।
मीटिंग के बाद वित्त मंत्रालय ने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अपने IT सिस्टम को मजबूत करें और ग्राहक डेटा की सुरक्षा को सबसे पहले प्राथमिकता दें। वित्त मंत्रालय ने कहा कि मिथॉस से पैदा होने वाला खतरा ऐसा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया। इसके लिए वित्तीय संस्थानों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल और हाई लेवल की तैयारी की जरूरत है।
सरकार अब एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे साइबर हमलों की पहचान रियल-टाइम में हो सके। इसके तहत सभी बैंक और वित्तीय संस्थान एक साझा प्लेटफॉर्म पर जुड़ेंगे, जहां किसी भी खतरे की जानकारी तुरंत शेयर की जा सकेगी। इस सिस्टम में CERT-In जैसी एजेंसियों की भी अहम भूमिका होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी हमले को फैलने से पहले ही रोका जा सके।
यह खतरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में भी इस AI मॉडल को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने हाल ही में बैंक के बड़े अधिकारियों के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी। इसमें उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा था कि वे अपने सिस्टम को मिथॉस से पैदा होने वाले संभावित खतरों के लिए तैयार रखें।