बालासोर से बालेश्वर तक:आखिर क्यों बदली जा रही है ओडिशा के 64 शहरों और जगहों के नामों की स्पेलिंग ?

कैबिनेट ने राज्य की भाषाई पहचान को मजबूत करने के लिए कई स्थानों के पुराने अंग्रेजी नामों में संशोधन का निर्णय लिया है। वहीं बंद पड़ी सहकारी कताई मिलों और पावरलूम इकाइयों को राहत देने के लिए 361 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी गई है।
भाषाई विरासत को संरक्षित करने की पहल
सीएम मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार का मानना है कि कई स्थानों के नाम अंग्रेजी अभिलेखों में गलत रूप में दर्ज हैं। इन नामों को ओडिया भाषा के वास्तविक उच्चारण के अनुरूप किया जाएगा। इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।
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26 जिलों की 64 जगहों में होगा बदलाव
सरकार ने 26 जिलों में स्थित 64 स्थानों के अंग्रेजी नामों की स्पेलिंग बदलने को मंजूरी दी है। लंबे समय से प्रचलित औपनिवेशिक दौर के नामों को संशोधित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे स्थानीय इतिहास और परंपराओं का बेहतर प्रतिनिधित्व हो सकेगा। यह कदम सांस्कृतिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुराने रिकॉर्ड में दर्ज हैं कई गलतियां
राज्य सरकार के अनुसार कई शहरों और कस्बों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक उच्चारण से अलग दर्ज हैं। वर्षों से चली आ रही इन विसंगतियों को अब सुधारा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे स्थानीय भाषा को उचित सम्मान मिलेगा। साथ ही नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगी।
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कपड़ा उद्योग को दिया जाएगा बढ़ावा
कैबिनेट बैठक में कपड़ा क्षेत्र को राहत देने पर भी सहमति बनी। सरकार ने लंबे समय से बंद पड़ी सहकारी कताई मिलों और पावरलूम इकाइयों के बकाया दायित्वों को निपटाने का फैसला लिया है। इसके लिए विशेष वित्तीय पैकेज स्वीकृत किया गया। इससे उद्योग क्षेत्र में नई गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
361 करोड़ रुपए के बजट को मिली मंजूरी
राज्य मंत्रिमंडल ने कपड़ा उद्योग के विकास के लिए 361 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य बंद पड़ी इकाइयों को फिर से शुरू करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। माना जा रहा है कि इस फैसले से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। साथ ही उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों को राहत मिल सकेगी।












