रुपया पड़ा भारी!GDP दोगुनी हुई, फिर भी भारत नहीं बन पाया दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी

भारत की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद देश अभी तक दुनिया की टॉप-3 इकोनॉमी में जगह नहीं बना पाया है। लंबे समय से भारत का लक्ष्य 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने का रहा है लेकिन कमजोर होते रुपए ने इस सफर को धीमा कर दिया। एक विश्लेषण के मुताबिक FY 2018-19 से FY 2025-26 के बीच भारत की नॉमिनल GDP करीब 190 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 364 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गई। हालांकि डॉलर में इसकी वास्तविक तस्वीर उतनी मजबूत नजर नहीं आती।
डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया
रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में एक डॉलर की औसत कीमत करीब 69 रुपए थी जो 2025-26 तक बढ़कर 85 रुपए के पार पहुंच गई। रुपए में लगातार आई कमजोरी का सीधा असर भारत की GDP के डॉलर वैल्यूएशन पर पड़ा। यही वजह रही कि रुपए में तेज ग्रोथ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था डॉलर के हिसाब से उतनी बड़ी नहीं दिख पाई जितनी वास्तव में बढ़ी है।
रुपया स्थिर रहता तो भारत बन जाता तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी
विश्लेषण में दावा किया गया है कि अगर रुपए की विनिमय दर 2018-19 के स्तर के आसपास स्थिर रहती, तो भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 तक करीब 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती थी। ऐसे में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाता। लेकिन मौजूदा फॉरेक्स रेट के हिसाब से भारत की GDP करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास आंकी जा रही है। यानी सिर्फ रुपए की कमजोरी की वजह से करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का अंतर पैदा हो गया।
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क्यों अहम है डॉलर में GDP का आकार
ग्लोबल स्तर पर देशों की आर्थिक ताकत का आकलन अक्सर डॉलर में GDP के आधार पर किया जाता है। यही वजह है कि घरेलू स्तर पर मजबूत ग्रोथ के बावजूद कमजोर करेंसी किसी देश की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रैंकिंग को प्रभावित कर सकती है। भारत फिलहाल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट उसकी वैश्विक आर्थिक स्थिति को सीमित कर रही है।
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5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य अब भी चुनौती
भारत सरकार लगातार मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि देश जल्द 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बन सके। हालांकि इसके लिए सिर्फ घरेलू विकास दर ही नहीं बल्कि रुपए की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक हालात भी अहम भूमिका निभाएंगे।












