दुनिया में कई शहर ऐसे हैं जहां प्रदूषण से जूझने के लिए अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां नियम इतने सख्त हैं कि लोग नियम तोड़ने से पहले सौ बार सोचते हैं। कनाडा का शहर बर्नबी इसी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीना सिर्फ गलत आदत नहीं बल्कि कानून तोड़ने जैसा माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति पार्क, सड़क, मैदान या किसी सार्वजनिक स्थान पर सिगरेट जलाता है, तो तुरंत उस पर कार्रवाई हो सकती है।
यह शहर आज दुनिया में साफ हवा और सख्त नियमों के लिए एक खास पहचान बना चुका है। यहां प्रशासन ने लोगों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए ऐसे नियम लागू किए हैं, जो न सिर्फ प्रदूषण को कम करते हैं बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन की ओर भी प्रेरित करते हैं। यही वजह है कि यह शहर अब “नो-स्मोकिंग सिटी” के तौर पर जाना जा रहा है।
बर्नबी में सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका मतलब यह है कि आप किसी पार्क में बैठकर, समुद्र किनारे घूमते हुए या खेल के मैदान में सिगरेट नहीं पी सकते। यहां तक कि गोल्फ कोर्स जैसे खुले इलाकों में भी धूम्रपान की अनुमति नहीं है। शहर प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने से न सिर्फ वातावरण खराब होता है बल्कि आसपास मौजूद लोगों की सेहत पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए इस पर सख्त रोक लगाई गई है।
इस शहर में सिर्फ सार्वजनिक जगहों पर ही नहीं बल्कि इमारतों के आसपास भी धूम्रपान पर नियंत्रण रखा गया है। किसी भी बिल्डिंग के दरवाजे, खिड़की या वेंटिलेशन के पास 6 मीटर के दायरे में सिगरेट पीना कानून के खिलाफ है। इस नियम का मकसद यह है कि सिगरेट का धुआं अंदर मौजूद लोगों तक न पहुंचे। इससे खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
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कई देशों में ई-सिगरेट या वेपिंग को सामान्य सिगरेट से कम नुकसानदायक मानकर थोड़ी छूट दी जाती है, लेकिन बर्नबी में ऐसा नहीं है। यहां ई-सिगरेट, वेपिंग, सिगार और पाइप-सभी पर एक समान कानून लागू होता है। इसका मतलब साफ है कि किसी भी तरह का धूम्रपान सार्वजनिक जगहों पर पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रशासन का मानना है कि सभी प्रकार के धुएं से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, इसलिए किसी को भी छूट नहीं दी गई है।
यहां नियम तोड़ना महंगा साबित हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर सिगरेट पीते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। यह जुर्माना 100 से लेकर 500 कनाडाई डॉलर तक हो सकता है। इसके अलावा शहर में निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात रहते हैं, जो नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं। कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
बर्नबी में इन नियमों के पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों की सेहत और पर्यावरण की सुरक्षा है। सिगरेट के टुकड़े यानी फिल्टर पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। ये आसानी से नष्ट नहीं होते और माइक्रोप्लास्टिक का बड़ा स्रोत बनते हैं। इसके अलावा सेकंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं से होने वाली बीमारियों को रोकना भी इन नियमों का अहम उद्देश्य है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization भी इस बात को मानता है कि स्मोक-फ्री जोन बनाने से दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में कमी आती है।
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बर्नबी की एक खास बात यह भी है कि यहां की लगभग 25 प्रतिशत जमीन पार्क और प्राकृतिक क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखी गई है। इसका सीधा फायदा यह है कि यहां की हवा साफ रहती है और लोग खुले वातावरण में स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। शहर की यह योजना न सिर्फ पर्यावरण को बचाने में मदद करती है बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब भी लाती है।
अगर भारत की बात करें तो यहां भी कई जगहों पर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक है, लेकिन इसका पालन उतना सख्ती से नहीं होता। दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इस तरह का पूरा मॉडल लागू करना आसान नहीं है, क्योंकि यहां आबादी ज्यादा है और निगरानी भी मुश्किल है। हालांकि, छोटे स्तर पर पार्कों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों पर सख्ती बढ़ाकर इस दिशा में कदम उठाया जा सकता है। अगर नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाए, तो धीरे-धीरे बड़े बदलाव संभव हैं।
सिर्फ बर्नबी ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देश अब धूम्रपान के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं। जैसे मेक्सिको ने पर्यटन स्थलों पर भी स्मोकिंग पर पाबंदी लगा दी है। वहीं भूटान में तंबाकू की बिक्री तक पर रोक है। इसके अलावा न्यूजीलैंड भविष्य में पूरी तरह स्मोक-फ्री देश बनने की योजना पर काम कर रहा है, जहां आने वाली पीढ़ियां सिगरेट खरीद ही नहीं पाएंगी।