पीपुल्स संवाददाता, भोपाल। कैंसर से जूझ रहे मरीजों के अच्छी खबर है। अब गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में गंभीर कैंसर मरीजों के इलाज को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां ट्यूमर बोर्ड का गठन किया जा रहा है, जो गंभीर कैंसर के मामले में उपचार की दिशा और रणनीति तय करेगा। बोर्ड में विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त टीम होगी, जो एक साथ बैठकर मरीज की रिपोर्ट का विश्लेषण कर सबसे उपयुक्त इलाज या सर्जरी का निर्णय लेगी।
कैंसर के इलाज में अलग-अलग विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है, लेकिन सभी विशेषज्ञों के राय या सम्मति जरूरी होती है। सभी विशेषज्ञों के ओपीनियन में मरीज और उसके परिजनों को समय, पैसे और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता था, लेकिन ट्यूमर बोर्ड बनने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो जाएगी। देश के प्रमुख संस्थानों जैसे केरल के श्रीचित्रा, बेंगलुरु के निमहंस सहित देश के बड़े संस्थानों में इसी तरह बोर्ड काम करते हैं। अब प्रदेश में पहली बार जीएमसी में इसे शुरू किया जा रहा है। मालूम हो कि मप्र में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2020 में प्रदेश में कैंसर मरीजों की संख्या 78 हजार के आसपास थी, जो 2025 में बढ़कर 90 हजार के करीब पहुंच चुकी है। भोपाल में भी प्रति एक लाख पर 110 महिलाओं और 106 पुरुषों को कैंसर की बीमारी है।
जानकारी के मुताबिक शुरूआत में बोर्ड का गठन जीएमसी के स्त्री रोग विभाग में किया जाएगा। महिलाओं में होने वाले ओवेरियन कैंसर के लिए इसकी शुरुआत की जाएगी। बोर्ड में स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ ऑन्कोलॉजी मेडिसिन विशेषज्ञ, ऑन्को सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, जनरल सर्जन सहित अन्य विधाओं के अनुभवी डॉक्टर शामिल होंगे। इसके बाद एक एक कर सभी विभागों में यह बोर्ड काम करने लगेगा।
ट्यूमर बोर्ड एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम होती है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल रहते हैं। यह टीम नियमित रूप से बैठकर कैंसर मरीजों के केस पर चर्चा करती है। मरीज की बायोप्सी रिपोर्ट, स्कैन, मेडिकल हिस्ट्री और वर्तमान स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ मिलकर तय करते हैं कि सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथैरेपी या इनका संयोजन सबसे बेहतर रहेगा। इससे इलाज में एकरूपता और सटीकता आती है।
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ट्यूमर बोर्ड के साथ मरीजों की जांच के जीएमसी में जल्द ही पेट सीटी यूनिट भी शुरू किया जाएगा। विभागीय स्तर पर टेंडर हो गए हैं, बताया जा रहा है कि साल के अंत तक सभी जगह पेट सीटी मशीन शुरू हो जाएगी। इसके लिए जरूरी बंकर का निर्माण भी हो गया है। इस बंकर में लीनियर एस्केलेटर स्थापित किया जाएगा।
ट्यूमर बोर्ड बनने से बेहतर और समयबद्ध इलाज मिलेगा
ट्यूमर बोर्ड बनने से मरीजों को बेहतर और समयबद्ध इलाज मिल सकेगा। यह व्यवस्था कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाएगी। बोर्ड बनने के बाद मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। बोर्ड सभी प्रकार के ट्यूमर के लिए काम करेगा।
डॉ. कविता एन सिंह, डीन गांधी मेडिकल कॉलेज
2020 में स्थिति
महिला - 39717
पुरुष - 38171
2025 में मरीजों की संख्या
महिला - 45200
पुरुष - 43097
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भोपाल में मरीजों की संख्या
महिलाएं : 110.1 मरीज प्रति एक लाख पर
पुरुष : 106.7 मरीज प्रति एक लाख पर
बच्चे : 9.4 मरीज प्रति एक लाख पर
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बीमारी के आंकड़े महिलाओं में
बीमारी - मामले - कितना बढ़ा
ब्रेस्ट कैंसर - 33.9 - 2.3 प्रतिशत बढ़ रहा
सर्विक्स - 12.1 - 2.1 प्रतिशत कम हो रहा
ओवरी - 7.9 - 1.8 प्रतिशत बढ़ रहा
बीमारी के आंकड़े पुरुष में
मुंह - 16.3 - 3.8 प्रतिशत बढ़ रहा
जीभ - 8.8 - 0.1 प्रतिशत बढ़ रहा
लंग्स - 12.1 - 0.1 प्रतिशत बढ़ रहा
प्रोटेस्ट - 3.6 - 1.5 प्रतिशत बढ़ रहा
बीमारी के आंकड़े बच्चों में
2.9 - ब्लड कैंसर
1.7 - लिम्फोमा