भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और सुरों की मलिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। शनिवार शाम तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले के जाने से भारतीय संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
आशा भोसले का मध्य प्रदेश, खासकर इंदौर से गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा। उनका बचपन इंदौर की छावनी इलाके के मुराई मोहल्ले में बीता था, जिसकी यादें वे अक्सर साझा करती थीं।
परिजनों के अनुसार, आशा ताई को सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां बेहद पसंद थीं और वे खास तौर पर इंदौर से गेहूं मंगवाती थीं।
आशा भोसले और लता मंगेशकर की बचपन की तस्वीर
करीब 17 साल पहले वे एक कार्यक्रम में इंदौर आई थीं और सयाजी होटल में ठहरी थीं। उस दौरान उन्होंने रिश्तेदारों से घर का बना खाना मंगवाया था।
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परिजनों के मुताबिक, बचपन में आशा भोसले अपनी बहन लता मंगेशकर और परिवार के साथ छावनी से तोपखाना तक करीब 2.5 किमी पैदल चलकर भोजन करने जाया करती थीं।


मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इंदौर से उनका जुड़ाव शहर के लिए गर्व की बात है।
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आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’ और ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
आशा भोसले को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया था। उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है और वे ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर थीं।