NFHS-6 रिपोर्ट में दिखा बदलाव:प्रदेश में घटी घरेलू हिंसा, महिलाओं की 35 प्रतिशत बढ़ी डिजिटल भागीदारी

कभी घर की चाहरदीवारी में चुपचाप सह ली जाने वाली परेशानियां अब धीरे-धीरे कम हो रही हैं और महिलाओं की आवाज पहले से ज्यादा बुलंद हो रही है। हाल ही में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) रिपोर्ट प्रदेश में इसी बदलाव की एक झलक दिखाती है। 2019-21 की एनएफएचएस-5 में घरेलू हिंसा का आंकड़ा 28.0 प्रतिशत था, जो अब घटकर 21.4 प्रतिशत रह गया है।
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प्रदेश में घटी घरेलू हिंसा, महिलाओं की 35 प्रतिशत बढ़ी डिजिटल भागीदारी
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भोपाल। यह बदलाव महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता और सामाजिक माहौल में सुधार का संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट में महिलाओं की शिक्षा, इंटरनेट उपयोग, बच्चों के टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। हालांकि दूसरी ओर कुपोषण के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय बने हुए हैं, जो आने वाले समय में सरकार और समाज दोनों के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं।

महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता में सुधार

NFHS-6 रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आई है। पहले जहां यह आंकड़ा 28.0 प्रतिशत था, अब घटकर 21.4 प्रतिशत रह गया है। वहीं 18 से 29 वर्ष की युवतियों में यौन हिंसा के मामले भी 1.1 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत हो गए हैं। इसे महिलाओं की बढ़ती जागरूकता और सामाजिक बदलाव का असर माना जा रहा है। लगातार चल रहे जागरूकता अभियानों और कानूनी सहायता की आसान पहुंच ने महिलाओं को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया है।

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इंटरनेट बना महिलाओं की ताकत

सर्वे के मुताबिक प्रदेश में महिलाओं के इंटरनेट इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां 26.9 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती थीं, अब यह आंकड़ा बढ़कर 62.0 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अब महिलाएं बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी जानकारी के लिए मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर हो रही हैं। पुरुषों में भी इंटरनेट उपयोग का प्रतिशत 55.7 से बढ़कर 77.7 प्रतिशत हो गया है। डिजिटल पहुंच बढ़ने से महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है।

बच्चों की सेहत में सकारात्मक बदलाव

रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी राहत भरी तस्वीर सामने आई है। 12 से 23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण की दर 77.4 प्रतिशत से बढ़कर 81.5 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा बच्चे जरूरी टीकों के दायरे में आ रहे हैं। गांवों और शहरों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जागरूकता अभियानों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। आने वाले समय में इसका असर बच्चों की बेहतर सेहत और बीमारियों की रोकथाम में देखने को मिलेगा।

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कुपोषण के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट में कुपोषण को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े भी सामने आए हैं। सामान्य से कम लंबाई वाले बच्चों की संख्या 35.7 प्रतिशत से घटकर 31.4 प्रतिशत हुई है, लेकिन बच्चों में कुपोषण 18.9 प्रतिशत से बढ़कर 23.8 प्रतिशत हो गया है। गंभीर कुपोषण भी 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 6.8 प्रतिशत पहुंच गया है। वहीं कम वजन वाले बच्चों की संख्या 33.0 प्रतिशत से बढ़कर 39.7 प्रतिशत हो गई है। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था और पोषण योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

सामाजिक बदलाव की दिशा में सकारात्मक संकेत

रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं तक कानूनी जानकारी और न्याय तक पहुंच पहले के मुकाबले आसान हुई है। अदालतें भी अब इन मामलों में त्वरित कानूनी प्रक्रिया और सख्त रवैया अपना रही हैं, जिससे हिंसा करने वालों में कानून का डर बढ़ा है। नवजीवन पाथ फाउंडेशन की एडवोकेट मीनाक्षी नारनवारे ने कहा कि घरेलू हिंसा का रेशियो कम होना समाज के लिए शुभ संकेत है। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल पहुंच के जरिए प्रदेश में सामाजिक विकास की दिशा मजबूत हो रही है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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