नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली HC में सुनवाई, 10 हजार के मुचलके वाले नोटिस को दी चुनौती

नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली HC में सुनवाई जारी है। नेहा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि संबंधित प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और उनकी मुवक्किल ने न तो हिंसा का आह्वान किया और न ही किसी को कानून तोड़ने के लिए उकसाया।
BNSS की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस पर सवाल
नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि इस मामले का दायरा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस तक सीमित है। उन्होंने बताया कि नेहा बोरा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और AISA की नेता हैं। याचिका में मजिस्ट्रेट के उस निर्देश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत नेहा बोरा से शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया है। हाई कोर्ट में इसी नोटिस की वैधता और उससे जुड़े पहलुओं पर दलीलें रखी जा रही हैं।
वकील का दावा- नारे लगाने के बाद हिरासत में ली गईं नेहा बोरा
सुनवाई के दौरान गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नेहा बोरा 16 अक्टूबर को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मंडी हाउस पहुंची थीं। उनके मुताबिक, वहां पहुंचने के 10 से 15 मिनट के भीतर ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। वकील ने दावा किया कि नेहा बोरा ने कोई अपराध नहीं किया था और उन्हें केवल नारे लगाने के कारण हिरासत में लिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया। हालांकि ये दलीलें याचिकाकर्ता के वकील की ओर से अदालत में रखी गई हैं।
मंडी हाउस में जुटने की अपील का दिया हवाला
नेहा बोरा की ओर से पेश वकील ने प्रदर्शन से पहले हुई घटनाओं का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर को शाम 4 बजे एक पोस्ट के जरिए जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से अचानक हटाए जाने के फैसले का विरोध किया गया था। शंकरनारायणन ने अदालत में नक्शे पर जंतर-मंतर की जगह दिखाते हुए कहा कि पोस्ट में लोगों से मंडी हाउस में जुटने की अपील की गई थी। उनके मुताबिक पोस्ट में कहीं भी हिंसा करने, कानून तोड़ने, शांति भंग करने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की बात नहीं कही गई थी। उन्होंने यह भी दलील दी कि लोगों को किसी अपराध को अंजाम देने के लिए इकट्ठा होने का आह्वान नहीं किया गया था।
हिरासत और वकीलों से संपर्क नहीं करने देने का आरोप
सुनवाई के दौरान वकील ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनों के दौरान लोगों को हिरासत में लेना और उन्हें अपने वकीलों से संपर्क नहीं करने देना एक चलन बन गया है। उन्होंने दावा किया कि नेहा बोरा को रात में आरके पुरम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और सुबह तड़के तक उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी। वकील ने अदालत के सामने हिरासत से जुड़े इन पहलुओं को उठाते हुए कहा कि संबंधित प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे। उन्होंने दोहराया कि नेहा बोरा ने न तो हिंसा के लिए उकसाया और न ही ऐसा कोई आह्वान किया।
राज्य और केंद्र सरकार की ओर से भी पेश हुए वकील
इस मामले में नेहा बोरा की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन अदालत में पेश हुए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित पेश हुए।




















