जबलपुर में दो भाइयों पर लगाया NSA हाईकोर्ट ने किया रद्द, कहा- ‘आंखें मूंदकर छीनी आजादी’

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा दो भाइयों पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने आंखें मूंदकर दोनों याचिकाकर्ताओं की स्वतंत्रता छीनी, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दो भाइयों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
मामला घमापुर निवासी राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और उसके भाई राजेश ठाकुर उर्फ भैया से जुड़ा है। दोनों की ओर से हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर NSA के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 4 जनवरी 2026 को घमापुर थाने में हुई मारपीट की घटना में कुल चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। अगले दिन 5 जनवरी को पुलिस ने चारों को हिरासत में लिया, लेकिन दो अन्य आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दिया गया और दोनों भाइयों की गिरफ्तारी छिपाई गई।
फरार बताकर लगाया गया NSA
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें फरार बताया और 6 जनवरी को उनके खिलाफ NSA लगाने की कार्रवाई की गई। पुलिस के प्रतिवेदन के आधार पर जिला कलेक्टर ने दोनों के खिलाफ नजरबंदी का आदेश जारी कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए दोनों भाइयों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में पुलिस के पास CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) जैसी तकनीक उपलब्ध है। इसके जरिए किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड कुछ ही समय में वेरिफाई किया जा सकता है।
बिना वेरिफिकेशन के भेजे गए गलत आंकड़े- कोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इसके बावजूद गोहलपुर के सीएसपी, एडिशनल एसपी और एसपी ने रिकॉर्ड का पर्याप्त वेरिफिकेशन किए बिना गलत आंकड़े जिला कलेक्टर को भेजे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिला कलेक्टर ने भी रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच किए बिना सिर्फ एक दिन में फाइल पर हस्ताक्षर कर नजरबंदी का आदेश जारी कर दिया।
20 मामलों का दिया गया था हवाला
प्रशासन की ओर से दोनों भाइयों के खिलाफ NSA लगाने के लिए कुल 20 मामलों का हवाला दिया गया था। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि प्रशासन ने जिन 14 मामलों को लंबित बताया था, उनमें से 11 मामलों में याचिकाकर्ता बरी हो चुके थे। कोर्ट के सामने यह भी आया कि एक मामले में केस नंबर तक गलत दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने NSA आदेश किया रद्द
मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड की जांच के बाद डिवीजन बेंच ने दोनों भाइयों के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा जारी NSA के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फैसले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनने से पहले रिकॉर्ड और तथ्यों की सही तरीके से जांच करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।




















