PU Special :एमपी के शहर अब खुद जुटाएंगे विकास के लिए पैसा, टेंपल और ग्रीन बॉण्ड से बढ़ेगी निकायों की कमाई

एमपी में शहरों के विकास के लिए नगरीय निकायों को अब सरकार के बजट और अनुदान पर निर्भरता कम करनी होगी। राज्य सरकार निकायों को अपनी संपत्तियों, धार्मिक पर्यटन, सीवेज के पानी और ग्रीन एनर्जी से कमाई करने के लिए तैयार कर रही है।
एमपी के शहर अब खुद जुटाएंगे विकास के लिए पैसा, टेंपल और ग्रीन बॉण्ड से बढ़ेगी निकायों की कमाई
एमपी के शहर अब खुद जुटाएंगे विकास के लिए पैसा

अशोक गौतम, भोपाल। इसके लिए टेंपल बॉण्ड, म्युनिसिपल बॉण्ड और ब्लू-ग्रीन बॉण्ड जैसे वित्तीय विकल्पों पर जोर दिया जाएगा। साथ ही सीवेज वाटर के पुन: उपयोग और सोलर बिजली उत्पादन से आय बढ़ाने की योजना है। सरकार का मकसद है कि निकाय अपने नए संसाधनों से सड़क, पानी, सीवरेज और दूसरी शहरी सुविधाओं का विकास कर सकें।

धार्मिक पर्यटन वाले शहरों में टेंपल बॉण्ड की तैयारी

धार्मिक पर्यटन वाले शहरों को इस रणनीति में विशेष रूप से शामिल किया गया है। अभी उज्जैन के लिए टेंपल बॉण्ड जारी करने की तैयारी की जा रही है। इसी मॉडल पर मैहर, ओरछा, अमरकंटक, नलखेड़ा, ओंकारेश्वर, चित्रकूट, सलकनपुर और सांची जैसे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों के लिए भी बॉण्ड तैयार किए जाएंगे। इससे तीर्थस्थलों पर बढ़ते श्रद्धालुओं के दबाव के अनुसार सुविधाएं और आधारभूत संरचनाएं विकसित करने के लिए पूंजी जुटाई जा सकेगी।

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ग्रीन बॉण्ड से पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं को मिलेगा निवेश

ग्रीन बॉण्ड के जरिए पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए निवेश जुटाने की योजना है। भोपाल और इंदौर में इस दिशा में प्रयोग किए जा चुके हैं। अब उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित अन्य नगरीय निकायों को भी इसके लिए तैयार किया जाएगा। इन संसाधनों का इस्तेमाल ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं में किया जा सकेगा।

सीवेज के पानी से भी निकाय बढ़ाएंगे अपनी कमाई

निकायों की आय बढ़ाने के लिए सीवेज वाटर को भी संसाधन बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भोपाल और इंदौर के अलावा धार, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, कटनी और उज्जैन सहित अन्य शहरों को ट्रीटेड सीवेज वाटर के पुन: उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा। इसके लिए औद्योगिक इकाइयों के साथ अनुबंध कर उपचारित पानी बेचा जा सकेगा, जिससे उद्योगों को वैकल्पिक जल स्रोत और निकायों को नियमित आय मिल सकेगी।

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सोलर बिजली से घटेगा नगरीय निकायों का खर्च

ग्रीन एनर्जी के तहत नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। फ्लोटिंग सोलर बिजली संयंत्रों से उत्पादित सस्ती बिजली निकायों को उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे जलप्रदाय, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी व्यवस्थाओं पर बिजली का खर्च घटाने में मदद मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि शहर अपनी जरूरतों के लिए खुद संसाधन जुटा सकें।

अलग-अलग शहरों में अलग मॉडल पर होगा काम

टेंपल बॉण्ड के लिए मैहर, ओरछा, अमरकंटक, नलखेड़ा, ओंकारेश्वर, चित्रकूट, सलकनपुर और सांची को शामिल करने की तैयारी है। ग्रीन बॉण्ड के लिए उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित अन्य निकायों को तैयार किया जाएगा। वहीं, सीवेज वाटर रीयूज के लिए धार, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, कटनी और उज्जैन सहित अन्य शहरों पर काम होगा। ग्रीन एनर्जी मॉडल में सोलर और फ्लोटिंग सोलर बिजली के जरिए निकायों का खर्च घटाने पर जोर रहेगा।

निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जारी होंगे बॉण्ड

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बॉण्ड जारी किए जाएंगे। महाकाल टेंपल बॉण्ड जारी करने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह ग्रीन और अन्य बॉण्ड भी जारी किए जाएंगे, ताकि नगरीय निकायों के पास विकास कार्यों के लिए अपने संसाधन उपलब्ध हो सकें।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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