PU Special :AI की सलाह पर 16 साल की किशोरी प्रेमी के साथ भोपाल पहुंची, घर छोड़ने से पहले चुना था नया शहर

पल्लवी वाघेला, भोपाल। एआई से पूछा कि उत्तर प्रदेश के आसपास ऐसा कौन-सा शहर है, जहां हरियाली और सुकून हो और दूसरे शहरों से कनेक्टिविटी भी अच्छी हो। जवाब में भोपाल का नाम सबसे ऊपर आया। इसके बाद देहरादून, रीवा और पंचकूला के विकल्प भी तलाशे। भोपाल की खूबियां जानने के बाद किशोरी प्रेमी के साथ यहां के लिए निकल पड़ी। हालांकि, रास्ते में एक राहगीर को दोनों की गतिविधियों पर संदेह हुआ। उसकी सूचना पर बीना-भोपाल के बीच दोनों को रेस्क्यू कर लिया गया। काउंसलिंग के बाद किशोरी को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
बहन का देवर है प्रेमी, परिवार की मंजूरी का था डर
किशोरी का प्रेमी उसकी बड़ी बहन का देवर है। दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे और उनके बीच प्रेम संबंध थे। किशोरी को आशंका थी कि परिवार उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा और शादी की अनुमति भी नहीं देगा। दूसरी ओर युवक के परिवार में उसकी शादी के लिए लड़की तलाशने की बात चल रही थी। इसी डर के चलते किशोरी युवक पर घर छोड़ने का दबाव बना रही थी। आखिरकार दोनों ने साथ जाने का फैसला कर लिया।
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भोपाल के साथ दूसरे शहरों के विकल्प भी देखे
काउंसलिंग में किशोरी ने बताया कि उसने केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों के बारे में भी जानकारी जुटाई थी। देहरादून, रीवा और पंचकूला के विकल्प भी सामने आए। उसने शहरों की हरियाली, प्राकृतिक खूबसूरती, सुकून और आवागमन की सुविधाओं को परखा। भोपाल की झीलें और प्राकृतिक वातावरण उसे पसंद आए। साथ ही यह भी देखा कि जरूरत पड़ने पर दूसरे शहरों तक पहुंचना कितना आसान होगा।
हर फैसले में एआई से सलाह
रेस्क्यू के बाद किशोरी ने काउंसलिंग में बताया कि वह हर बात के लिए एआई से सलाह लेती है। जिंदगी का इतना बड़ा फैसला था, ऐसे में एआई की मदद लेना जरूरी समझा। परिवार ने बताया कि उन्हें प्रेम प्रसंग की जानकारी नहीं थी। हालांकि, बड़ी बहन के सामने किशोरी ने एक बार मजाक में घर छोड़ने की बात कही थी, लेकिन परिवार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।
विकल्प बताता है एआई, जिम्मेदारी नहीं लेता
काउंसलर डॉ. दीप्ति सिंघल ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चे अपनी पसंद और स्वतंत्रता को लेकर संवेदनशील होते हैं। जब उन्हें लगता है कि परिवार उनकी बात स्वीकार नहीं करेगा, तो वे जल्दबाजी में बड़े फैसले ले सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म शहर, करियर और जीवनशैली के विकल्प तो बताते हैं, लेकिन उनके सही-गलत होने की जिम्मेदारी नहीं लेते। किसी शहर की हरियाली और शांति देखकर वहां बसने का फैसला नहीं किया जा सकता। रहने का खर्च, रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक माहौल भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किशोरों को डिजिटल समझ देने के साथ परिवार में भरोसे और संवाद का माहौल बनाना जरूरी है।




















