PU Special :भाजपा संगठन में फेरबदल के बाद अब मप्र सहित कई राज्यपालों की बारी, पांच राज्यों के गवर्नरों को हो चुके हैं 5 साल से ज्यादा

भाजपा संगठन में नियुक्तियों के बाद मध्यप्रदेश समेत उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और उत्तराखंड के राज्यपालों में बदलाव की चर्चा तेज है। इन राज्यों में कई राज्यपालों का कार्यकाल पांच से सात साल से अधिक हो चुका है। संविधान के अनुच्छेद 156 और हालिया मप्र हाईकोर्ट के फैसले में राज्यपाल के कार्यकाल की स्थिति स्पष्ट की गई है।
भाजपा संगठन में फेरबदल के बाद अब मप्र सहित कई राज्यपालों की बारी, पांच राज्यों के गवर्नरों को हो चुके हैं 5 साल से ज्यादा
फाइल फोटो

राजीव सोनी, भोपाल। भाजपा संगठन में विभिन्न राज्यों के प्रभारी और संगठन महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद मध्यप्रदेश सहित आधा पांच बड़े राज्यों में राज्यपालों के बदलाव की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और उत्तराखंड के राज्यपालों की है। इन राज्यों में गवर्नरों का कार्यकाल 5 और 7 साल से ज्यादा हो चुका है। विजयादशमी तक यह बदलाव संभावित माना जा रहा है।

राज्यपालों की नियुक्तियों और केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल का इंतजार

सत्ता और संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राज्यपालों की नियुक्तियों के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल का भी लंबे समय से इंतजार हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले महीने तक आधा दर्जन राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी जाएगी। संगठन की लंबित नियुक्तियों को मिली हरी झंडी भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने हाल ही में 36 राज्यों में प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों अलावा दो दर्जन राज्यों में प्रदेश महामंत्री (संगठन) की नियुक्तियों को हरी झंडी दे दी है। कई महीनों से इन नियुक्तियों का इंतजार हो रहा था। संगठन ने उच्च स्तर पर विचार मंथन के बाद नियुक्ति आदेश जारी कर दिए।

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क्या कहता है, अनुच्छेद 156

संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपालों का सामान्य तौर पर कार्यकाल 5 साल का है लेकिन इसके बाद भी वह उत्तराधिकारी के आने तक पद पर रह सकते हैं। राष्ट्रपति की इच्छा तक वह इस पद पर आसीन रह सकते हैं इसमें निर्धारित समय का कोई प्रावधान नहीं है।

मप्र हाईकोर्ट का फैसला

दस दिन पहले ही मप्र हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए अनुच्छेद 156(3)का हवाला देते हुए यही बात कही है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला (1969)कृष्णा बल्लभ सहाय बनाम जांच आयोग का भी जिक्र किया है।

पांच राज्यों के गवर्नरों का लेखा-जोखा

  • राज्यपाल आचार्य देवव्रत को गुजरात में 7 साल से अधिक हो चुके हैं जबकि इसके पहले वह 12 अगस्त 2015 से 21 जुलाई 2019 तक हिमाचल प्रदेश में पदस्थ थे।
  • उत्तर प्रदेश में आनंदी पटेल भी 7 साल से अधिक समय से पदस्थ है।
  • मप्र में राज्यपाल मंगुभाई पटेल 8 जुलाई 2021 से कार्यरत हैं।
  • कर्नाटक में राज्यपाल थावरचंद गेहलोत भी 11 जुलाई 2021 से हैं।
  • उत्तराखंड में सेवानिवृत्त ले. जनरल गुरमीत सिंह के कार्यकाल को भी 5 साल पूरे हो चुके हैं।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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