PU Special :मप्र में निवेश का पूरा पैकेज: 43 हजार एकड़ औद्योगिक जमीन, खनिज संपदा से लेकर हाईवे तक मजबूत आधार

मध्यप्रदेश सरकार निवेशकों को 43 हजार एकड़ औद्योगिक जमीन, खनिज संपदा, हाईवे कनेक्टिविटी और पर्यटन अवसरों की जानकारी दे रही है। ऑटो, फार्मा, आईटी, लॉजिस्टिक्स समेत कई सेक्टरों पर फोकस है।
मप्र में निवेश का पूरा पैकेज: 43 हजार एकड़ औद्योगिक जमीन, खनिज संपदा से लेकर हाईवे तक मजबूत आधार
मप्र में निवेश का पूरा पैकेज

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निवेशकों को प्रदेश में उद्योग और कारोबार लगाने के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों की जानकारी सोशल मीडिया और अपनी वेबसाइट के माध्यम से दे रही है। सरकार का जोर यह बताने पर है कि मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए जमीन, पानी, खनिज संपदा, प्राकृतिक संसाधन और मजबूत सड़क नेटवर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। देश के बीचों-बीच स्थित होने का फायदा भी प्रदेश को मिल रहा है। सरकार के अनुसार मध्यप्रदेश से देश के अलग-अलग हिस्सों तक माल पहुंचाने की बेहतर सुविधा है और कई प्रमुख राज्यों तक सड़क मार्ग से अपेक्षाकृत कम समय में पहुंच बनाई जा सकती है। प्रदेश को 550 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में औद्योगिक निवेश को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। मध्यप्रदेश की निवेश रणनीति में पारंपरिक क्षेत्रों के साथ नए उद्योगों और सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। ऑटोमोबाइल, फार्मा, आईटी-आईटीईएस, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है।

43 हजार एकड़ से ज्यादा औद्योगिक जमीन उपलब्ध

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आधार औद्योगिक भूमि को माना जा रहा है। MPIDC के 123 औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 43 हजार एकड़ अविकसित भूमि उपलब्ध बताई गई है। इसके अलावा अलग-अलग उद्योगों के लिए 14 विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों का उद्देश्य संबंधित उद्योगों को सेक्टर आधारित सुविधाएं उपलब्ध कराना और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल तैयार करना है। MSME क्षेत्र के लिए भी अलग औद्योगिक आधार तैयार किया गया है। प्रदेश के 175 औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 5,097 एकड़ अविकसित भूमि उपलब्ध बताई गई है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को नए निवेश और विस्तार के लिए स्थान उपलब्ध कराने की योजना है।

पर्यटन भी निवेश के बड़े आधार के रूप में उभर रहा

मध्यप्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन पहले से ही एक मजबूत आधार रहा है। उज्जैन, महाकाल, ओंकारेश्वर और अन्य धार्मिक स्थलों के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक प्रदेश पहुंचते हैं। अब सरकार पर्यटन को केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसके साथ वन्यजीव, हेरिटेज, पुरातत्व, क्राफ्ट-हैंडलूम, ग्रामीण, एस्ट्रो और इको-टूरिज्म को नए आकर्षण के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में होटल, हॉस्पिटेलिटी, स्थानीय उत्पाद, परिवहन, मनोरंजन और दूसरी पर्यटन सेवाओं से जुड़े निवेश के अवसर तैयार हो रहे हैं।

बाघों के साथ चीतों ने भी बढ़ाया वन्यजीव पर्यटन का आकर्षण

मध्यप्रदेश लंबे समय से बाघों के लिए जाना जाता है लेकिन अब वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में चीतों की मौजूदगी भी नया आकर्षण बन रही है। प्रदेश के दो पार्कों में चीता पुनर्वास और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों ने पर्यटन की रुचि को एक नया आधार दिया है। वन्यजीव पर्यटन के साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को भी निवेश के संभावित क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। हेरिटेज पर्यटन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और दूसरी सेवाओं में कारोबार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

प्राणपुर से लेकर एस्ट्रो विलेज तक नए प्रयोग

मध्यप्रदेश में पर्यटन को नए रूप में विकसित करने के लिए प्राणपुर को देश का पहला क्राफ्ट-हैंडलूम टूरिज्म विलेज बनाने की पहल की गई है। इससे पारंपरिक शिल्प, हथकरघा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह एस्ट्रो विलेज जैसी अवधारणाओं के जरिए खगोल पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन के साथ ऐसे नए प्रयोग प्रदेश को देश के पर्यटन मानचित्र पर अलग पहचान देने की दिशा में किए जा रहे हैं।

देश के बीच में होने से मजबूत लॉजिस्टिक्स आधार

क्षेत्रफल के लिहाज से मध्यप्रदेश देश का दूसरा बड़ा राज्य है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दोनों दिशाओं की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रदेश को उत्तर-दक्षिण ट्रंक रूट, पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से मिलने वाली कनेक्टिविटी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स निवेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रतलाम को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़े प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने का लाभ भी निवेशकों को मिलने की बात कही जा रही है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान बनाने पर जोर है।

उद्योगों के लिए कई सेक्टरों पर एक साथ फोकस

550 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश सरकार अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में प्रदेश की कृषि उपज और खाद्यान्न उपलब्धता को आधार बनाया जा रहा है। इसके अलावा फल, मसाले और दूसरे कृषि उत्पादों से जुड़े प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी अवसर तलाशे जा रहे हैं। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट, फार्मा, टेक्सटाइल, आईटी-आईटीईएस, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पेट्रोकेमिकल, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टरों को भी निवेश के प्रमुख क्षेत्र के तौर पर रखा गया है।

एशिया के बड़े ऑटो टेस्टिंग ट्रैक का भी लाभ

प्रदेश की औद्योगिक पहचान में एशिया के बड़े ऑटो टेस्टिंग ट्रैक को भी महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ऑटोमोबाइल उद्योग में नए उत्पादों, वाहनों और तकनीकों के परीक्षण के लिए ऐसी सुविधाएं निवेशकों के लिए उपयोगी आधार तैयार करती हैं। इसी तरह ऊर्जा क्षेत्र में रीवा का 750 मेगावाट सौर संयंत्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का एक प्रमुख उदाहरण बताया जा रहा है। सरकार निवेशकों को औद्योगिक विकास के साथ ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी भी दे रही है।

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मप्र की पहचान के प्रमुख आधार

निवेशकों के सामने प्रदेश की विशेषताओं को कई प्रमुख बिंदुओं के जरिए रखा जा रहा है। इनमें तीन विश्व धरोहर स्थल, बाघों के साथ चीतों की मौजूदगी, इंदौर की स्वच्छता पहचान, रीवा का 750 मेगावाट सौर संयंत्र और बड़ा ऑटो टेस्टिंग ट्रैक शामिल हैं। इसके साथ प्रदेश की खनिज संपदा, जल संसाधन, वन क्षेत्र, कृषि उत्पादन, फल, मसाले और धार्मिक स्थलों को भी निवेश के संभावित आधार के रूप में बताया जा रहा है।

निवेशकों को वेबसाइट और सोशल मीडिया से दी जा रही जानकारी

MPIDC के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला के मुताबिक निवेशकों को मध्यप्रदेश की उपलब्धताओं और यहां मौजूद अवसरों के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से खनिज संपदा, निवेश क्षेत्र, हाईवे कनेक्टिविटी, वन्यजीव क्षेत्र, धार्मिक स्थल, खाद्यान्न, फल, मसाले और अन्य उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी जानकारी निवेशकों तक पहुंचाई जा रही है। इसका उद्देश्य निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए उपलब्ध जमीन, प्राकृतिक संसाधनों, बाजार तक पहुंच और विभिन्न सेक्टरों की संभावनाओं से परिचित कराना है।

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550 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर नजर

मध्यप्रदेश सरकार के निवेश अभियान का बड़ा लक्ष्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 550 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके लिए औद्योगिक निवेश, पर्यटन, कृषि-आधारित उद्योग, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से निवेशकों के लिए उपलब्ध औद्योगिक भूमि, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव, प्राकृतिक संसाधन, पर्यटन क्षमता और अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों की जानकारी को एक साथ सामने रखा जा रहा है। MPIDC और MSME के औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध जमीन को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। मध्यप्रदेश की निवेश रणनीति में अब केवल परंपरागत उद्योगों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक, एआई, आईटी, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ पर्यटन के नए रूपों और प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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