PU Special :42 साल की सरकारी सेवा के बाद भी जारी है पशु सेवा, सेवानिवृत्ति के बाद घर-घर पहुंचकर कर रहे इलाज

पिंडरई। कुंदन सिंह परस्ते ने 25 जून 1984 को पशु चिकित्सा विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी और लंबे सेवाकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में पशुपालकों और उनके पशुओं की सेवा की। वर्ष 1985 में एक पशु के इलाज के लिए जाते समय वे नदी में बह गए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी सेवा जारी रखी। आज भी गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते सहित अन्य पालतू पशुओं के इलाज में अपने लंबे अनुभव का उपयोग करते हुए वे पशुपालकों की मदद कर रहे हैं।
42 वर्षों तक पशु चिकित्सा विभाग में दी सेवाएं
कुंदन सिंह परस्ते ने 25 जून 1984 को पशु चिकित्सा विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी। लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने डिठौरी, बीजाडांडी, पोंडी नगरार और माणिकवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों में पशुपालकों और उनके पशुओं की सेवा की। वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के कारण क्षेत्र के पशुपालकों से उनका सीधा जुड़ाव बना रहा और आज भी पशु के बीमार होने पर कई पशुपालक उनसे संपर्क करते हैं।
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पशु के इलाज के लिए नदी में बह गए थे
सेवाकाल के दौरान कई मुश्किल परिस्थितियां भी आईं। वर्ष 1985 में एक पशु के इलाज के लिए जाते समय वे नदी में बह गए थे। पशु सेवा के दौरान सामने आई यह घटना आज भी उन्हें याद है, इसके बावजूद उन्होंने अपनी सेवा जारी रखी और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर पशुओं के उपचार के लिए लगातार पहुंचते रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद भी घर पहुंचकर कर रहे उपचार
सेवानिवृत्ति के बाद भी पशुपालकों से उनका संपर्क बना हुआ है। जरूरत पड़ने पर वे आज भी पशुओं के उपचार के लिए घर पहुंचते हैं और वर्तमान में डॉ. केके मरावी के निर्देशन में घर पहुंच सेवा प्रदान कर रहे हैं। क्षेत्र के पशुपालक भी जरूरत के समय उनसे संपर्क करते हैं और उनके लंबे अनुभव का लाभ लेते हैं।
गाय से लेकर कुत्तों तक का करते हैं इलाज
कुंदन सिंह परस्ते गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते सहित अन्य पालतू पशुओं के उपचार में अपने लंबे अनुभव का उपयोग करते हुए पशुपालकों की मदद करते हैं। जरूरतमंद पशुपालकों को उपचार के साथ पशुओं की देखभाल संबंधी सलाह भी देते हैं। वर्षों के अनुभव के कारण ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों से उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है।
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पद से सेवानिवृत्ति, सेवा का सिलसिला जारी
कुंदन सिंह परस्ते के लिए पशुओं की सेवा केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रही। 42 वर्षों की सरकारी सेवा पूरी होने के बाद भी पशुपालकों और पशुओं से उनका जुड़ाव कायम है। पद से सेवानिवृत्ति जरूर हुई, लेकिन सेवा का सिलसिला आज भी जारी है।



















