PU Special :फैमिली डे-दूरी रिश्तों में नहीं, सिर्फ शहरों में, वेकेशन से लेकर हर त्योहार तक मनाते हैं साथ

बदलती जीवनशैली और बढ़ती दूरी के बावजूद भोपाल के कई परिवार रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के नए तरीके अपना रहे हैं। कोई 18 सदस्यों के साथ एक ही घर में रहकर त्योहार मनाता है, तो कोई विदेश और दूसरे शहरों में रह रहे परिजनों से मिलने के लिए महीनों पहले योजना बनाता है। ऑनलाइन जुड़ाव और साथ घूमने से पारिवारिक रिश्ते कायम हैं।
फैमिली डे-दूरी रिश्तों में नहीं, सिर्फ शहरों में, वेकेशन से लेकर हर त्योहार तक मनाते हैं साथ
भोपाल में डॉ. अनिल अवस्थी, डॉ. अशोक अवस्थी और सुशील कुमार अवस्थी के परिजन एकसाथ।

प्रीति जैन, भोपाल। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जब परिवार के सदस्यों के पास एक-दूसरे के लिए समय निकालना भी चुनौती बन गया है, तब कुछ परिवार साथ होने की परंपरा को नए अंदाज में निभा रहे हैं। कहीं 18 सदस्य एक ही छत के नीचे रहकर त्योहारों की जिम्मेदारियां बांटते हैं, तो कहीं शादी के बाद अलग-अलग शहरों और देशों में बसे बच्चे भी हर खास मौके पर डिजिटल माध्यम से परिवार से जुड़ते हैं। जन्मदिन हो, सालगिरह या दिवाली-होली जैसे त्योहार, इन परिवारों के लिए जश्न तभी पूरा होता है, जब अपनों की मौजूदगी महसूस हो। साथ घूमने के लिए महीनों पहले प्लानिंग, विदेश में रह रहे सदस्यों से मिलने के लिए लंबी छुट्टियां और ऑनलाइन सेलिब्रेशन तक, परिवार के रिश्तों को समय और दूरी की सीमाओं से परे बनाए रखने की कोशिश जारी है। इस फैमिली डे पर जानते हैं, कैसे बदलती जीवनशैली के बीच परिवार साथ रहने और जुड़े रहने के नए तरीके खोज रहे हैं।

18 सदस्यों के साथ हर सेलिब्रेशन

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हमारे परिवार में 18 सदस्य एक साथ रहते हैं। मेरे पिता डॉ. अनिल अवस्थी, चाचाजी डॉ. अशोक अवस्थी और मेरे ताऊजी सुशील कुमार अवस्थी का परिवार साथ रहता है। इतने बड़े परिवार के साथ रहने का अपना अलग ही आनंद है। तीज-त्योहार हो या किसी का जन्मदिन घर के ही इतने सदस्य हो जाते हैं कि किसी कमी का अहसास नहीं होता। हमें कहीं घूमने जाना होता है तो ट्रेवलर करना होती है, क्योंकि वेकेशंस भी सब एक साथ मनाते हैं। भाभियां वर्किंग हैं तो घर के बड़े बच्चों का ध्यान रख पाते हैं। सभी के पास त्योहारों की जिम्मेदारियां बंटी हुईं हैं, एक भाभी एक फेस्टिवल की तैयारी करती हैं तो दूसरी दूसरे फेस्ट की। काम भी बंट जाता है और सेलिब्रेशन का आनंद भी दोगुना हो जाता है।

श्रुति अवस्थी, आंत्रप्रेन्योर

फैमिली के साथ बाली घूमने गए

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अब बच्चों की शादी हो चुकी है, वे अपने-अपने घरों और कामों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन फिर भी हम सभी की हमेशा यही कोशिश रहती है कि आपस में मिलते-जुलते रहें और हर खास अवसर को साथ मिलकर मनाएं। चाहे किसी का जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह हो या फिर दिवाली, रक्षाबंधन, होली जैसे त्योहार हों, हम सब पहले से ही मिलकर योजना बनाते हैं ताकि पूरा परिवार एक साथ समय बिता सके। बड़ी बिटिया ऑस्ट्रेलिया में रहती है और छोटी बिटिया चेन्नई में है, लेकिन दूरी कभी रिश्तों के बीच नहीं आती। यदि परिवार का कोई सदस्य भारत से बाहर हो या किसी दूसरे शहर में रहता हो, तो भी वह ऑनलाइन जुड़कर हर कार्यक्रम और सेलिब्रेशन का हिस्सा बनता है, ताकि परिवार के साथ उसका जुड़ाव हमेशा बना रहे। हाल में हम पूरी फैमिली मिलकर वेकेशन मनाने बाली गए थे।

नीलम संजय विजयवर्गीय, बिजनेसवूमन

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पूरा परिवार हर साल जाता है US

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साल में कम से कम दो बार कोशिश करते हैं कि पूरा परिवार साथ हो। बेटा राहुल अपनी फैमिली के साथ यूएस में रहता है लेकिन हर साल हम वहां जाते हैं। मेरी बेटी और उसके दोनों बच्चे भी इस बार साथ में यूएस गए। पूरा परिवार एक समय पर एक साथ हो इसके लिए महीनों पहले से प्लानिंग करना होती है। टिकट बुकिंग्स से लेकर सभी के शेड्यूल का ध्यान रखकर प्लानिंग करते हैं। इस बार मेरा और पोती का जन्मदिन भी सिएटल,यूएस में ही मनाया। बेटा राहुल में एक या दो साल में एक बार लंबी छुट्टी लेकर घर जरूर आता है तब हम भारत में ही कहीं घूमने जाते हैं।

डॉ. शिखा रस्तोगी, साइकोलॉजिस्ट

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नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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