इटारसी:पटवारियों की 'आर-पार' की जंग, 3 दिवसीय सामूहिक हड़ताल; ठप होंगे राजस्व कार्य
अपनी वर्षों से लंबित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मध्यप्रदेश के पटवारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज (15 जुलाई) से प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। पटवारी संघ का साफ कहना है कि यह केवल एक सांकेतिक चेतावनी है यदि सरकार अब भी नहीं जागी, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज व चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
क्यों ठप हुआ कामकाज?
पटवारी संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। यह समयसीमा समाप्त होने के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस पहल न होने पर संगठन ने 'काम बंद, कलम बंद' हड़ताल का रास्ता चुना।
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5 मुख्य मांगें पर अड़ा है संघ
- कैडर रिव्यू और पदोन्नति:लंबित कैडर रिव्यू को तत्काल लागू किया जाए, पात्र पटवारियों को पदोन्नति दी जाए और इससे वंचितों को समयमान वेतनमान का लाभ मिले।
- विभागीय परीक्षा: नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति के लिए नियमित रूप से विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए।
- सुरक्षा का अधिकार: फील्ड पर लगातार विवादों का सामना करने वाले पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में शामिल किया जाए।
- लंबित मानदेय का भुगतान:स्वामित्व योजना, कृषि व लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी जैसे शासकीय कार्यों को पटवारियों ने निजी संसाधनों से पूरा किया है, जिसका लंबित मानदेय तुरंत दिया जाए।
- मनमाने ट्रांसफर रद्द हों: पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध किए गए तबादलों को तत्काल निरस्त किया जाए।
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पटवारी संघ ने दी चेतावनी
इस हड़ताल के कारण आज से ही नामांतरण, सीमांकन, भू-अभिलेख दुरुस्ती और राजस्व से जुड़े तमाम अहम काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे भविष्य में शासकीय योजनाओं से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
Edited By: Sumit Shrivastava






















