इंदौर में तीन दिन की हड़ताल पर पटवारी:राजस्व कार्य होगा प्रभावित

इंदौर। पटवारी संघ का कहना है कि लंबे समय से मांगों के समाधान का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। आंदोलन के कारण सीमांकन, नामांतरण, पीएम किसान सम्मान निधि सत्यापन और प्रमाणपत्रों से जुड़े कई काम प्रभावित हो गए हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन और तेज किया जाएगा। इससे किसानों और आम लोगों की परेशानियां भी बढ़ने लगी हैं।
वर्षों से लंबित मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश पटवारी संघ अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रयासरत है। पूर्व में मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में पटवारी महाधिवेशन के लिए समय देने का आश्वासन दिया था, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई तारीख तय नहीं की गई और न ही वर्षों से लंबित मांगों का समाधान निकाला गया। इससे संपूर्ण पटवारी संवर्ग खुद को शोषित और उपेक्षित महसूस कर रहा है। इसी कारण पटवारियों ने तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश और सांकेतिक आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
15 से 17 जुलाई तक प्रभावित रहेंगे राजस्व के काम
ज्ञापन में पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। इसके चलते बेटमा तहसील सहित पूरे इंदौर जिले में सीमांकन, नामांतरण, पीएम किसान सम्मान निधि सत्यापन और जाति-आय प्रमाणपत्रों की जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो गए हैं। तहसील कार्यालयों में सामान्य कामकाज लगभग ठप हो गया है। इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन पांच मांगों पर अड़ा है पटवारी संघ
पटवारी संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू लागू करने, समयमान वेतनमान का लाभ देने, नायब तहसीलदार विभागीय परीक्षा जल्द कराने, जज प्रोटेक्शन एक्ट में पटवारियों को शामिल करने, लंबित मानदेय का भुगतान करने तथा नियम विरुद्ध किए गए स्थानांतरण निरस्त करने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि इन सभी मांगों पर लंबे समय से कोई निर्णय नहीं लिया गया। यही कारण है कि पटवारी अब आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा की जा रही है।
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तहसीलों में पसरा सन्नाटा, किसान हो रहे परेशान
आंदोलन का असर बेटमा तहसील कार्यालय सहित पूरे जिले में साफ दिखाई दे रहा है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी कृषि भूमि से जुड़े कार्यों के लिए पहुंचे किसान निराश होकर वापस लौट रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चला तो कृषि सीजन के दौरान उनकी आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियां और बढ़ जाएंगी। तहसील कार्यालयों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने से लोगों के जरूरी काम भी अटक गए हैं।
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार उनकी वर्षों से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ का कहना है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल तीन दिवसीय सांकेतिक आंदोलन जारी है और पटवारी अपने निर्णय पर कायम हैं। आने वाले दिनों में शासन की ओर से क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
Edited By : Rohit Sharma












