पटवारियों की मांगों पर डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल की पहल, मुख्य सचिव को भेजी नोटशीट

भोपाल। मध्यप्रदेश में बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई के बावजूद पटवारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। शुक्रवार सुबह पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। बैठक के बाद संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मांगों पर विचार के लिए डिप्टी सीएम ने मुख्य सचिव (CS) को नोटशीट भेजी है। संघ के नेताओं के मुताबिक बैठक में पटवारियों की मांगों पर चर्चा हुई और डिप्टी सीएम ने उन्हें उचित माना है। हालांकि, मांगों पर अंतिम निर्णय को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। संघ ने प्रदेशभर के पटवारियों से धैर्य बनाए रखने और एकजुट होकर आंदोलन जारी रखने की अपील की है।
पटवारी संघ ने रखीं अपनी मांगें
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ हुई बैठक में प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी, मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने पटवारियों की समस्याओं के साथ बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। बैठक के बाद दोनों संघों के अध्यक्षों ने कहा कि पटवारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। उनके अनुसार चर्चा के बाद संबंधित मांगों पर आगे की प्रक्रिया के लिए नोटशीट मुख्य सचिव को भेजी गई है।
ये भी पढ़ें: रीवा में स्वामित्व योजना में लापरवाही पर 15 पटवारी निलंबित, कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश
बर्खास्तगी और निलंबन वापस लेने की मांग
पटवारी संघ ने साफ किया है कि आंदोलन के दौरान की गई बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस ली जानी चाहिए। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक पटवारी काम पर नहीं लौटेंगे। संघ ने अपने सदस्यों से अपील की है कि वे कार्रवाई से घबराएं नहीं और धैर्य के साथ अपनी मांगों पर कायम रहें। पदाधिकारियों ने भरोसा जताया कि एकजुटता के साथ आंदोलन जारी रखने से उनकी समस्याओं पर उचित निर्णय हो सकेगा।
ये भी पढ़ें: 21 दिन से स्वामित्व योजना का काम ठप; 24 हजार पटवारी सरकार से सीधे टकराव में, रीवा में 15 सस्पेंड
स्वामित्व योजना के काम पर भी असर
पटवारियों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार की स्वामित्व योजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को इस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत प्रदेश में आबादी भूमि पर काबिज करीब 50 लाख हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया था। योजना के लिए एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्रियां कराने की समयसीमा तय की गई थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक निर्धारित अवधि पूरी होने में आठ दिन शेष रहने के बावजूद रजिस्ट्री शुरू नहीं हो सकी थी।



















