आयुष्मान भुगतान, NABH और डॉक्टरों की सुरक्षा… भोपाल की बैठक में अस्पताल संगठनों ने रखीं कई मांगें

भोपाल। प्रदेश के निजी अस्पतालों, चिकित्सकों और चिकित्सा संगठनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर भोपाल में प्रदेश स्तरीय संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में अस्पताल संचालक, चिकित्सक और विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में खास तौर पर आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान और NABH की अनिवार्यता को लेकर चर्चा हुई। बैठक में शामिल संगठनों ने कहा कि इन दोनों मुद्दों का अब स्पष्ट और समयबद्ध समाधान जरूरी है। संगठनों ने सात माह से अधिक समय से लंबित आयुष्मान भुगतान जल्द जारी करने और NABH की अनिवार्यता खत्म करने की मांग रखी।
7 महीने से ज्यादा लंबित है भुगतान
बैठक में कहा गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के कई निजी अस्पतालों के भुगतान सात महीने से भी अधिक समय से लंबित हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि मरीजों के इलाज के दौरान दवाइयों, जांच, ऑपरेशन, चिकित्सकों और कर्मचारियों के वेतन समेत कई खर्च अस्पतालों को पहले ही उठाने पड़ते हैं। संगठनों के मुताबिक, इलाज की सेवाएं देने के कई महीने बाद भी भुगतान लंबित रहने से अस्पतालों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए लंबित भुगतान का जल्द निपटारा जरूरी है।
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रिजेक्ट किए गए वैध क्लेम का भुगतान करने की मांग
संयुक्त संगठनों ने मांग की कि वर्तमान पोर्टल, पुराने पोर्टल, सीपीडी द्वारा रिजेक्ट किए गए और अन्य कारणों से लंबित सभी पात्र क्लेम का निश्चित समय-सीमा में निपटारा किया जाए। संगठनों का कहना है कि भविष्य में भी भुगतान एमओयू के अनुसार समय पर होना चाहिए। अनावश्यक देरी होने पर जवाबदेही तय करने की मांग भी बैठक में उठाई गई। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि अस्पताल ने वास्तविक उपचार पर खर्च किया है तो केवल तकनीकी, प्रक्रियात्मक या व्याख्या से जुड़े कारणों के आधार पर उसका पूरा भुगतान रोकना उचित नहीं है।
NABH की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
बैठक में NABH accreditation को अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया गया। चिकित्सा और अस्पताल संगठनों ने कहा कि NABH को स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रखा जाना चाहिए। संगठनों के अनुसार अस्पतालों में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानक जरूरी हैं, लेकिन इन नियमों को अस्पताल की श्रेणी, बेड क्षमता, उपलब्ध संसाधनों, भौगोलिक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। बैठक में लंबित आयुष्मान भुगतान का समयबद्ध निपटारा और NABH की अनिवार्यता समाप्त करना प्रमुख मांगों में शामिल रहा।
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अस्पतालों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग
बैठक में अस्पतालों से जुड़े लाइसेंस और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं को लेकर भी मांग रखी गई। संगठनों ने अलग-अलग विभागों से बार-बार लाइसेंस और अनुमति लेने की प्रक्रिया के बजाय सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की। संगठनों ने कहा कि किसी अस्पताल का पंजीयन निलंबित या रद्द करने, अस्पताल बंद कराने अथवा गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई से पहले पर्याप्त नोटिस दिया जाना चाहिए। अस्पताल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर, निष्पक्ष सुनवाई और कारणयुक्त आदेश मिलना चाहिए।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर जोर
बैठक में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पतालों के खिलाफ हिंसा, धमकी, तोड़फोड़ और डराने-धमकाने की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई। संगठनों ने Doctors Protection Act सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के प्रभावी और त्वरित क्रियान्वयन की मांग की। इसके साथ ही डॉक्टरों, विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की वास्तविक उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक नियम बनाने की बात कही गई।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठे
बैठक में सरकारी चिकित्सकों और मेडिकल कॉलेज फैकल्टी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संगठनों ने रिक्त पदों, अत्यधिक कार्यभार, पदोन्नति, स्थानांतरण, कार्यस्थल सुरक्षा, सेवा शर्तों और अनावश्यक गैर-चिकित्सकीय कार्यों जैसे विषयों के समाधान के लिए समयबद्ध व्यवस्था की मांग की।
नीति बनाने से पहले डॉक्टरों से संवाद की मांग
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि डॉक्टरों और अस्पतालों को प्रभावित करने वाली किसी भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नीति, योजना या नियामकीय बदलाव को लागू करने से पहले मान्यता प्राप्त चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए।


















