
मंडला। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री देवीसिंह सैयाम ने मंच से अपनी ही सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने सैयाम ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनपद स्तर का था, लेकिन हैरानी की बात है कि इसमें एक भी जनपद सदस्य नजर नहीं आया।
अपने संबोधन के दौरान सैयाम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को संबोधित करते हुए कहा कि यह जनपद का कार्यक्रम है, लेकिन एक भी जनपद सदस्य यहां मौजूद नहीं है। यह बहुत गंभीर बात है। उन्होंने अधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच करने और यह समझने की बात कही कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। सैयाम ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और अगर जरूरत पड़ी तो वे खुद बैठकर इस मामले को सुलझाने के लिए तैयार हैं।
पूर्व मंत्री ने अपने बयान में कहा कि सरकारी योजनाएं किसी एक व्यक्ति या समूह की नहीं होतीं, बल्कि यह सभी के लिए होती हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नेताओं के चक्कर में पड़कर इस तरह की मनमानी ठीक नहीं है और इसमें सुधार होना चाहिए।
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इस पूरे बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे सियासी माहौल गर्म हो गया है।
सैयाम ने अपने संबोधन के दौरान एक साल पुरानी घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल टिकरवारा में हुए इसी तरह के कार्यक्रम में उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि मैं पूर्व मंत्री होने के बावजूद मंच पर नहीं बैठ सका। मुझे दूल्हा-दुल्हन के साथ नीचे ही घूमना पड़ा, जबकि सरपंच जैसे लोग मंच पर बैठे थे। इस घटना को उन्होंने अपमानजनक बताते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ नहीं होना चाहिए।
सैयाम ने कहा कि जनपद सदस्यों की अनुपस्थिति यह दिखाती है कि कहीं न कहीं भेदभाव हो रहा है। उन्होंने मंच से आरोप लगाया कि क्षेत्र में मंत्री और विधायक की मनमानी चल रही है, जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधि और सरपंच भी परेशान हैं।
अपने भाषण में सैयाम ने विकास कार्यों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में कई सरपंच आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरपंचों को काम पूरा करने के लिए अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डेढ़ करोड़ रुपए की राशि वापस चली गई, लेकिन उसे अब तक वापस नहीं लाया जा सका।
अपने संबोधन के अंत में सैयाम ने कहा कि अगर उनके बयान से किसी को ठेस पहुंचती है, तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की अनदेखी और मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती।