
मध्य प्रदेश की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश नहीं हुईं। उन्हें 22 अप्रैल को नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष भोपाल में उपस्थित होना था लेकिन इस बार भी वे खुद नहीं पहुंचीं। उनकी ओर से कुछ प्रतिनिधि जरूर विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय में पहुंचे।
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को विधायक को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। हालांकि स्पीकर की व्यस्तता के कारण पहले की तारीख आगे बढ़ा दी गई थी और 22 अप्रैल को पेशी तय की गई थी। अब मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में होगी जहां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जाएगी।
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीना में चुनाव कराने से बचने के लिए जानबूझकर फैसला टाला जा रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तय समयसीमा के बावजूद फैसला नहीं लिया जा रहा।
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उमंग सिंघार ने कहा कि ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए लेकिन इस केस में करीब ढाई साल बीत चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस से विधायक निर्मला सप्रे के बीजेपी में जाने से जुड़े सभी सबूत पेश किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विधानसभा अध्यक्ष फैसला नहीं लेते हैं तो हाईकोर्ट इस पर अंतिम निर्णय दे सकता है।
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