जनगणना के कारण फिलहाल नहीं बढ़ेंगे शहरों के वार्ड, MP में पुराना परिसीमन लागू, 2032 में बढ़ सकती हैं सीटें

अशोक गौतम, भोपाल। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया के चलते शहरों के विस्तार और नए वार्डों के गठन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। आगामी नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्तमान वार्ड संरचना (पुराने परिसीमन) के आधार पर ही आयोजित किए जाएंगे। जनगणना के आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही नए सिरे से परिसीमन का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि वर्ष 2032 के स्थानीय निकाय चुनावों में ही आबादी के नए आंकड़ों के अनुपात में वार्डों और सीटों की संख्या बढ़ सकेगी।
जून-जुलाई में प्रस्तावित हैं चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग के स्तर पर मतदाता सूची, मतदान केंद्र और ईवीएम (EVM) समेत अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
प्रस्तावित समय: आगामी निकाय चुनाव जून-जुलाई में कराए जाने का प्रस्ताव है।
चुनाव के चरण: निकाय और पंचायत चुनावों को एक साथ कराने अथवा दो अलग-अलग चरणों में कराने के विकल्पों पर मंथन चल रहा है।
वार्षिक पुनरीक्षण: आयोग की वेबसाइट के अनुसार 2026 में नगरीय निकायों और पंचायतों की मतदाता सूचियों के वार्षिक पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। जनवरी में नई मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन प्रस्तावित है, जिसमें 10 से 15 प्रतिशत नए मतदाता जुड़ने का अनुमान है।
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चुनाव का ढांचा और तैयारियां (2026 डेटा)
कुल मतदाता: राज्य के नगरीय निकायों में 1.60 करोड़ और ग्रामीण (पंचायत) क्षेत्रों में 4.06 करोड़ से अधिक मतदाता हैं।
मतदान केंद्र: चुनाव के लिए लगभग 96 हजार मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 24 हजार केंद्र शहरी क्षेत्रों में होंगे।
EVM प्रबंधन: स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए आयोग करीब 1.48 लाख EVM मशीनों की व्यवस्था कर रहा है।
397 करोड़ रुपये के बजट की मांग
चुनाव के सफल संचालन के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने वित्त विभाग से करीब ₹397 करोड़ के बजट का प्रस्ताव भेजा है:
चुनावी व्यवस्थाएं: विभिन्न व्यवस्थाओं और लॉजिस्टिक्स के लिए ₹247 करोड़।
तुलना व बचत: वर्ष 2022 के निकाय व पंचायत चुनावों में करीब ₹221 करोड़ खर्च हुए थे। इस बार आयोग डिजिटल और पेपरलेस चुनावी व्यवस्था पर विशेष जोर दे रहा है, जिससे अनुमानित ₹30 करोड़ तक की बचत हो सकती है।
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