PU Special :एमपी के लीडर डॉ. मोहन यादव, शिवराज सिंह, उमा भारती और दिग्विजय सिंह टाइम मैनेजमेंट, पॉजिटिविटी, योग-मेडिटेशन से रहते हैं स्ट्रेसफ्री

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दिग्विजय सिंह सहित अन्य शीर्षस्थ राजनेता व्यस्ततम लाइफ स्टाइल और कामकाजी तबाव को कैसे मैनेज करते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी तनावरहित, स्वस्थ और शांत मन के साथ इतने ऊर्जावान कैसे रह पाते है... उन्होंने इसका श्रेय सुबह की सैर, खानपान, संयमित जीवनशैली, पॉजिटिविटी और नियमित योग-प्राणायाम को दिया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर 'पीपुल्स समाचार' से हुई विशेष चर्चा में प्रदेश के इन दिग्गज नेताओं ने अपने खान-पान से लेकर योग-मेडिटेशन, आचार-विचार और टाइम मैनेजमेंट का भी जिक्र किया। यह भी बताया कि राजनीतिक और कामकाजी तनाव के बीच कुछ वक्त अपनी सेहत के लिए अवश्य निकालते हैं। सभी लोगों को भी उन्होंने यही सुझाव देते हुए कहा अच्छी नींद के साथ खान-पान संतुलित रखें, योग-प्राणायाम का डंका तो पूरी दुनिया में बज रहा है।
सेहत के संस्कार बचपन से, तनाव को हावी नहीं होने देता: डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बताते हैं कि अच्छी सेहत के संस्कार मुझे घर से ही मिले। बचपन से ही कसरत के साथ योग और प्राणायाम की तरफ रुझान हो गया। सुबह की शुरूआत योग-मेडिटेशन से ही होती है। कुछ वक्त खुली हवा में सैर के लिए निकालता हूं। योग से ही ऊर्जा और मानसिक शक्ति पाता हूं। इससे विषम परिस्थितियों में भी सभी के साथ संयमित व्यवहार कर पाता हूं। इसके अलावा सात्विक खान-पान और सकारात्मक बने रहने का भी अपना महत्व है। योग ही मेरे जीवन की वह उपलब्धि है जिससे हर वक्त तरोताजा रहते हुए मन शांत भी शांत रहता है।
यह है मेरी खुशहाली और सफलता का फॉर्मूला: शिवराज सिंह
केंद्रीय कृषक कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि जब काम को बोझ नहीं, कर्तव्य और सेवा मानकर करते हैं, तो व्यस्तता भी आनंद देने लगती है। मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना कमजोरी नहीं, समझदारी है। मन परेशान हो तो अपनी बात साझा कीजिए और जरूरत पड़ने पर मदद लीजिए। शिवराज कहते हैं कि जैसे क्रिकेट में 20-20 होता है, वैसे ही मैं अपने जीवन में 20-20-20 के सूत्र पर काम करता हूं- पहले 20 मिनट आसन करिए, फिर 20 मिनट प्राणायाम और अगले 20 मिनट अपनी पूरी दिनचर्या के बारे में विचार करें।इस सूत्र से जीवन सफल और सार्थक बन सकता है। मेरा प्रयास रहता है कि हर परिस्थिति में सकारात्मक रहूं और समस्याओं से घबराने के बजाय उनका समाधान खोजूं। खुशी तो छोटी-छोटी बातों में भी मिलती है। परिवार के साथ समय बिताना, संगीत, और प्रकृति के बीच रहना मुझे नई ऊर्जा देता है।
हमेशा खुश रहती हूं, यही सबसे बड़ा स्ट्रेस बस्टर: उमा भारती
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती हमेशा और हर हाल में खुश रहने को ही सबसे बड़ा 'स्ट्रेस बस्टर' मानती हैं। वह कहती हैं अपनी पर्सनल लाइफ पर ज्यादा बात नहीं करती। हां, सुबह की सैर कभी नहीं छोड़ती। कहीं भी रहूं मार्निंग वाक के लिए घंटे-डेढ़ घंटे का समय निकाल ही लेती हूं। भरपूर नींद भी जरूरी है। ध्यान-प्राणायाम तो जीवनशैली का हिस्सा है ही। शाकाहारी और संतुलित भोजन भी व्यक्ति को ऊर्जावान बनाए रखता है।
पॉजिटिविटी,अल्पाहार और योग निद्रा से रहता हूं तरोताजा: दिग्वियज सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते हैं कि योग- प्राणायाम, पॉजिटिविटी के साथ-साथ सात्विक अल्पाहार मेरी दिनचर्या में शामिल है। सुबह जल्दी उठने से लेकर दिनभर की भागदौड़ और कामकाजी व्यस्तता को मैनेज करना पड़ता है। हर वक्त तरोताजा रहने का राज यही है कि तनाव नहीं पालता। खान-पान पूरी तरह सात्विक ही है। कई दशकों से एक समय ही भोजन करता हूं। शाम को स्प्राउट्स, फल और दूध ही लेता हूं।कामकाज के चलते हम लोगों को ट्रेवल बहुत करना पड़ता है। थकान से बचने के लिए योग निद्रा का सहारा लेता हूं। मित्रों के साथ जमकर ठहाके भी लगाता हूं।




















