‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई रफ्तार!CM डॉ. मोहन यादव ने कूनो में छोड़े 2 बोत्सवाना चीते, राज्य में चीतों की संख्या 57!

श्योपुर। मध्य प्रदेश एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में अपनी जगह मजबूत करता दिख रहा है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज एक अहम पल दर्ज हुआ, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो बोत्सवाना चीतों को खुले जंगल में मुक्त किया।
दो चीतों की फ्री-रनिंग शुरुआत
बोत्सवाना से आए नौ चीतों ने क्वारंटीन और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी कर ली थी। इन्हें पहले छोटे बाड़ों में रखा गया, ताकि वे भारतीय वातावरण को समझ सकें। अब इनमें से दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ दिया गया। यह प्रक्रिया कूनो नदी के पास स्थित सुरक्षित क्षेत्र से की गई, जहां पूरी निगरानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल लागू रहे। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने सुबह करीब 8 बजे इन चीतों को जंगल की ओर रवाना किया।
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बोत्सवाना से आए चीतों की खासियत
फरवरी 2026 में लाए गए नौ चीतों में 6 मादा और 3 नर शामिल थे। इन्हें भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से ग्वालियर लाया गया और फिर हेलीकॉप्टर से कूनो पहुंचाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ये चीते अलग जेनेटिक बैकग्राउंड से आए हैं, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा कम होगा।

‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत कैसे हुई?
इस मिशन की नींव 17 सितंबर 2022 को रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। यह कदम इतिहास में दर्ज हुआ क्योंकि यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग कैट ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट था। इसे प्रोजेक्ट चीता नाम दिया गया।
उसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए और 2026 में फरवरी के अंत में बोत्सवाना से 9 नए चीते शामिल किए गए। धीरे-धीरे कूनो चीता आबादी का घर बनता गया।
सुरक्षा और खास तैयारियां
इस पूरे ऑपरेशन में सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया। एक दिन पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों की टीम जैसे DFO, जिला पंचायत CEO और SDM ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। हर छोटी-बड़ी चीज की जांच की गई ताकि चीतों को किसी भी तरह का खतरा न हो। यह पूरी व्यवस्था एक तरह से रियल टाइम वाइल्डलाइफ मिशन कंट्रोल सिस्टम की तरह काम कर रही थी।
एक चीते का रेस्क्यू- KAP12 की कहानी
कूनो से कुछ दिन पहले एक और बड़ी घटना सामने आई थी। नर चीता KAP12 जंगल से भटककर राजस्थान के सवाई माधोपुर के आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था। वन विभाग की टीम ने तुरंत एक्शन लिया और 8 मई को उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर वापस कूनो लाया गया।
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कूनो में चीता परिवार कैसे बढ़ा?
कूनो अब सिर्फ ट्रांसलोकेशन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि प्रजनन की सफलता की कहानी भी बन चुका है। मादा चीता ज्वाला ने 2023 में भारत में पहले शावकों को जन्म दिया। अब तक 27 से अधिक शावक जन्म ले चुके हैं। कुल संख्या बढ़कर लगभग 57 तक पहुंच चुकी है। नवंबर 2025 में मादा चीता मुखी ने भी शावकों को जन्म देकर इस मिशन को और मजबूत किया।
भविष्य की योजना
आने वाले समय में इन चीतों को गांधी सागर अभयारण्य और नौरादेही अभयारण्य जैसे क्षेत्रों में भी स्थानांतरित किया जा सकता है।











