श्योपुर:23 दिन बाद कूनो लौटा चीता KAP-2, रणथंभौर से ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

श्योपुर। चीता KAP-2 नई टेरिटरी की तलाश में कूनो से निकलकर रणथंभौर पहुंच गया था। वन विभाग ने निगरानी के बाद उसे रेस्क्यू करने का फैसला लिया। दो घंटे के ऑपरेशन में उसे सुरक्षित पकड़ा गया। स्वास्थ्य जांच के बाद उसे फिर से जंगल में छोड़ दिया गया।
कूनो से रणथंभौर तक पहुंचा चीता
कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीते अक्सर नई टेरिटरी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इसी कड़ी में नर चीता KAP-2 अप्रैल महीने में अपने मूल क्षेत्र से बाहर निकल गया। वह मध्य प्रदेश से होते हुए राजस्थान के कोटा जिले के इटावा इलाके तक पहुंचा। इसके बाद वह आगे बढ़ते हुए रणथंभौर टाइगर रिजर्व के सवाई माधोपुर क्षेत्र में जा पहुंचा। पिछले 23 दिनों से वह फलौदी रेंज के जंगलों में लगातार घूम रहा था। इस दौरान उसकी गतिविधियों पर वन विभाग की नजर बनी हुई थी।
वन विभाग ने किया रेस्क्यू
चीते की गतिविधियों पर कूनो और रणथंभौर दोनों क्षेत्रों की टीमें लगातार नजर बनाए हुए थीं। शुरुआत में उसे प्राकृतिक रूप से मूव करने दिया गया। लेकिन जब वह रिहायशी इलाकों में पहुंचने लगा, तब खतरा बढ़ गया। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और चीते के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रेस्क्यू का निर्णय लिया गया। वन विभाग ने स्थिति का आकलन करने के बाद तुरंत ऑपरेशन की योजना तैयार की।
दो घंटे के बाद किया गया ट्रैंकुलाइज
रेस्क्यू ऑपरेशन शुक्रवार सुबह शुरू किया गया, राजस्थान वन विभाग की टीम भी इसमें शामिल रही। रणथंभौर के फलौदी रेंज के काला कुआं क्षेत्र में चीते को ट्रैक किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद उसे ट्रैंकुलाइज किया गया। पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ अंजाम दी गई। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से एक विशेष बॉक्स में रखा गया।
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कूनो के जंगल में छोड़ा गया चीता
रेस्क्यू के बाद चीते को सड़क मार्ग से वापस कूनो नेशनल पार्क लाया गया। यहां पहुंचने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसकी पूरी स्वास्थ्य जांच की। जांच में चीता पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद उसे फिर से खुले जंगल में छोड़ दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में चीते को किसी तरह की चोट नहीं पहुंची। अब उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मार्च में भी किया गया था रेस्क्यू
यह पहला मौका नहीं है जब KAP-2 को राजस्थान से वापस लाया गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 में उसे कोटा के इटावा क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। इसके बावजूद वह फिर से अपनी टेरिटरी से बाहर निकल गया। यह स्थिति कूनो प्रबंधन के लिए एक नई चुनौती बन गई है। खुले जंगल में छोड़े गए चीते लगातार लंबी दूरी तय कर रहे हैं। वन विभाग अब उनकी मूवमेंट पर अधिक सतर्कता के साथ नजर बनाए हुए है।












