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पेंशनर्स को हाईकोर्ट से झटका:संशोधित वेतनमान पर बड़ा फैसला, अतिरिक्त वेतनवृद्धि की मांग खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशनर्स की अतिरिक्त वेतनवृद्धि की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि संशोधित वेतनमान चुनने के बाद कर्मचारी पुरानी वेतन व्यवस्था का लाभ नहीं ले सकते। यह फैसला वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के तहत सुनाया गया।
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संशोधित वेतनमान पर बड़ा फैसला, अतिरिक्त वेतनवृद्धि की मांग खारिज

जबलपुर। मध्य प्रदेश के पेंशनर्स को बड़ा झटका देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिरिक्त वेतनवृद्धि देने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि संशोधित वेतनमान चुनने के बाद कर्मचारी पुरानी वेतन व्यवस्था का लाभ दोबारा नहीं ले सकते। यह फैसला एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनाया।

पेंशनर्स संगठन की याचिका खारिज

यह याचिका पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि 1 जनवरी 2006 से पहले जिन कर्मचारियों की वेतनवृद्धि लंबित थी उन्हें पुरानी व्यवस्था के तहत एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट देकर वेतन और पेंशन का पुनर्निर्धारण किया जाए। इसके साथ ही बकाया राशि ब्याज सहित देने की भी मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

एक विकल्प चुनने के बाद दूसरा लाभ नहीं

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के नियम 9 के तहत कर्मचारियों को पहले ही दो विकल्प दिए गए थे:

  • 1 जनवरी 2006 से संशोधित वेतनमान स्वीकार कर तुरंत बढ़ा हुआ वेतन लेना
  • या पुरानी वेतन व्यवस्था में रहकर बाद में संशोधित वेतनमान अपनाना

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी ने स्वेच्छा से संशोधित वेतनमान का विकल्प चुन लिया तो वह बाद में पुरानी व्यवस्था के लाभों का दावा नहीं कर सकता।

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नियम 9 को बताया संवैधानिक और उचित

डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि नियम 9 न तो मनमाना है और न ही संविधान के समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। यह नियम कर्मचारियों को स्पष्ट विकल्प प्रदान करता है जिसे चुनने की स्वतंत्रता स्वयं दी गई थी।

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राज्य सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा। कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

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पेंशनर्स को बड़ा झटका

इस फैसले के बाद उन पेंशनर्स को राहत नहीं मिल सकी जो लंबे समय से अतिरिक्त वेतनवृद्धि और बकाया भुगतान की मांग कर रहे थे। कोर्ट के इस निर्णय के बाद वे अब संशोधित वेतनमान के लाभों तक ही सीमित रहेंगे।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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