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'तुम जैसे हजारों पति रख सकती हूं'...पत्नी के ताने पर हुई हत्या में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा 7 साल में बदली

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। छिंदवाड़ा के आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर सात साल कर दी गई। अदालत ने माना कि घटना पहले से तय नहीं थी, बल्कि पत्नी के कथित ताने के बाद गुस्से में हुई थी।
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पत्नी के ताने पर हुई हत्या में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा 7 साल में बदली

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। छिंदवाड़ा के एक व्यक्ति को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे घटाकर सात साल कर दिया। अदालत ने माना कि घटना पहले से रची गई साजिश का हिस्सा नहीं थी, बल्कि पत्नी के कथित ताने के बाद आरोपी ने गुस्से में वारदात को अंजाम दिया था।

पत्नी की मौत के मामले में बदली सजा

यह मामला छिंदवाड़ा जिले के चौरई थाना क्षेत्र का है। 18-19 जुलाई 2021 की रात बहेड़ी नदी के खैरा घाट पर शिवा और उसकी गर्भवती पत्नी किरण के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि नशे की हालत में शिवा ने पत्नी पर पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। चौरई (छिंदवाड़ा) की अदालत ने 20 जून 2023 को आरोपी को भादंवि की धारा 304ए का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ यह अपील हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी। आरोपी की ओर से अधिवक्ता जगत कुमार डहेरिया ने दलीलें रखीं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पत्नी द्वारा कहा गया कि तुम जैसे हजारों पति रख सकती हूं, एक ऐसा उकसावा था जिससे आरोपी ने अपना आपा खो दिया। अदालत ने माना कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और आरोपी की हत्या करने की पहले से कोई मंशा साबित नहीं होती। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी को इस बात का ज्ञान जरूर था कि पत्थर से हमला करने पर मौत हो सकती है, लेकिन घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी।

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खुद पुलिस को दी थी वारदात की सूचना

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि घटना के बाद आरोपी शिवा मौके से फरार नहीं हुआ। उसने खुद डायल-100 और अपने रिश्तेदारों को फोन कर पत्नी की हत्या की जानकारी दी। अदालत ने कहा कि यदि हत्या पहले से सोची-समझी होती, तो आरोपी स्वयं पुलिस को सूचना देने वाला पहला व्यक्ति नहीं होता।

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उम्रकैद की जगह अब 7 साल की सजा

इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में संशोधन किया। अदालत ने दोषसिद्धि को बदलते हुए आरोपी की सजा उम्रकैद से घटाकर सात साल कर दी। साथ ही माना कि यह मामला पूर्व नियोजित हत्या का नहीं, बल्कि अचानक हुए विवाद और उकसावे के बाद हुई घटना का है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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