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मप्र हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा-प्रदेश के टाइगर रिजर्वों को पिछले दस वर्षों में कितना बजट दिया?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रदेश के टाइगर रिजर्वों को पिछले 10 वर्षों में दिए गए बजट का ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने मप्र सरकार को टाइगर रिजर्वों में खाली पद भरने के निर्देश भी दिए। मामला कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से 10 बाघों की मौत और स्वतंत्र जांच की मांग से जुड़ा है।
मप्र हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा-प्रदेश के टाइगर रिजर्वों को पिछले दस वर्षों में कितना बजट दिया?
फाइल फोटो

जबलपुर।मप्र हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा है कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्वों के लिए पिछले 10 वर्षों में कितना बजट आवंटित किया गया है? जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने यह जानकारी इसलिए मांगी, क्योंकि याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि केन्द्र सरकार हर साल बजट में कटौती की जा रही है। इसके साथ ही बेंच ने मप्र सरकार को भी कहा है कि वह सभी टाईगर रिजर्वों के खाली पदों को भरने की कार्रवाई करे। मामले पर अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

मुंबई के अधिवक्ता की याचिका

यह जनहित याचिका चेंबूर (मुंबई) के अधिवक्ता व वन्य जीव प्रेमी सुबित चक्रवर्ती की ओर से दायर की गई है। आवेदक का कहना है कि 2 अप्रैल से अभी तक कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खौफनाक प्रसार से दस टाइगरों की मौत हो चुकी है। टाइगरों को बचाने के लिए सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर यह जनहित याचिका दाखिल की गई।

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उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी बने

याचिका में मांग की गई है कि एनटीसीए की गाइडलाइंस के तहत इन मौतों का पता लगाने एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाए। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने 29 मई 2026 को नोटिस जारी किए थे। बुधवार आगे हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह व प्रतीक रूसिया ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने केन्द्र सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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