पूर्व विधायक शशांक भार्गव को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत!आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विदिशा के पूर्व विधायक शशांक भार्गव को बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन पर एक युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर आरोप है। अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामलों को देखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
2026 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला विदिशा जिले के देहात थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2026 में पूर्व विधायक शशांक भार्गव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज छह आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड भी मौजूद है। ऐसे में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
मृतक ने वीडियो बनाकर लगाए थे गंभीर आरोप
अभियोजन के अनुसार मृतक युवक पूर्व विधायक शशांक भार्गव की जमीन बटाई पर जोतता था, लेकिन उसे फसल का हिस्सा नहीं दिया जाता था। आरोप है कि दबाव बनाकर उसका मकान भी अपने नाम करवा लिया गया। इतना ही नहीं, अभियोजन का दावा है कि पूर्व विधायक ने युवक को एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक विधायक की हत्या के लिए अवैध हथियार भी उपलब्ध कराए थे। जब युवक ने ऐसा करने से इनकार किया तो कथित तौर पर उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई। आत्महत्या से पहले युवक ने चार वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किए थे। इन वीडियो में उसने पूर्व विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उससे एक करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी और उसकी पत्नी के अपहरण की धमकी भी दी गई थी।
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बचाव पक्ष ने दी दलील
सुनवाई के दौरान पूर्व विधायक की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मृतक पहले उनका मैनेजर था और उस पर 42 लाख रुपये का कर्ज बकाया था जिसे उसने वापस नहीं किया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शशांक भार्गव के खिलाफ दर्ज पुराने सभी आपराधिक मामले राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम हैं और पुलिस पूछताछ के लिए उनकी हिरासत आवश्यक नहीं है।
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अदालत ने खारिज की अग्रिम जमानत
वहीं शासकीय अधिवक्ता एएस बघेल ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता पर जोर दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का विस्तृत अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है। साथ ही आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज छह आपराधिक मामलों को भी ध्यान में रखते हुए अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।












