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फायर सेफ्टी मानकों के बिना निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन पर MP हाईकोर्ट सख्त, 12 अक्टूबर को सुनवाई

फायर सेफ्टी और नगर निगम की अनुमति के बिना निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन को चुनौती देने वाली PIL पर MP हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को सुनवाई होगी। सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
फायर सेफ्टी मानकों के बिना निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन पर MP हाईकोर्ट सख्त, 12 अक्टूबर को सुनवाई

जबलपुर। फायर सेफ्टी और नगर निगम की जरूरी अनुमतियों के बिना नए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीकरण को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अब 12 अक्टूबर को सुनवाई होगी। सोमवार को पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को मौजूदा स्थिति से जुड़ी ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए समय दिया। इन याचिकाओं में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को जरूरी सुरक्षा मानकों और अनुमतियों की जांच किए बिना पंजीकरण दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। हाईकोर्ट में चल रहा यह मामला पहले भी अस्पतालों के पंजीकरण और नियमों के पालन से जुड़ी कार्रवाई की निगरानी के दायरे में रहा है।

जबलपुर में 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम

लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि जबलपुर में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने बताया कि शहर में वर्तमान में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम चल रहे हैं। इनमें से 63 अस्पतालों का पंजीकरण वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी याचिका में दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में जरूरी दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए बिना केवल ऑनलाइन आवेदन के आधार पर पंजीकरण जारी किए गए।

फायर सेफ्टी और नगर निगम की अनुमति का मुद्दा

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि निजी अस्पतालों को पंजीकरण देने से पहले क्या उनके यहां जरूरी फायर सेफ्टी इंतजाम, भवन संबंधी अनुमति और नगर निगम की आवश्यक स्वीकृतियां मौजूद हैं या नहीं, इसकी वास्तविक जांच की जा रही है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अधूरे दस्तावेजों और बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के पंजीकरण जारी करना नियमों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि अस्पतालों जैसे संवेदनशील संस्थानों के मामले में सुरक्षा मानकों की जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने नियमों के विपरीत संचालित अस्पतालों पर की गई कार्रवाई की जानकारी सरकार से मांगी थी। अप्रैल 2025 में कोर्ट के समक्ष सरकार की ओर से दो अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जाने की जानकारी भी रखी गई थी और संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

सरकार ने मांगा चार दिन का समय

सोमवार की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार पहले भी अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी है। मौजूदा स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देने वाली ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए उन्होंने चार दिन का समय मांगा। सरकार की ओर से समय मांगने के बाद कोर्ट ने नई रिपोर्ट पेश करने की अनुमति दी और इसके साथ यह भी कहा कि रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएं।

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12 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार अपनी नई स्टेटस रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं के वकीलों को भी उपलब्ध कराए, ताकि अगली सुनवाई में वे रिपोर्ट के आधार पर अपना पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई अब 12 अक्टूबर को होगी। उस दिन कोर्ट में सरकार की ओर से पेश की जाने वाली नई रिपोर्ट के आधार पर निजी अस्पतालों के पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और अब तक की गई कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अस्पतालों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निजी अस्पतालों के पंजीकरण की प्रक्रिया में केवल आवेदन और दस्तावेजों की औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं है। अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम, फायर सेफ्टी और भवन की वैधानिक अनुमति जैसे पहलुओं की भी जांच जरूरी है। यह मामला खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और कर्मचारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी और अग्निशमन व्यवस्था का पहले से सुनिश्चित होना जरूरी माना जाता है।

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हाईकोर्ट की निगरानी में चल रहा मामला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में निजी अस्पतालों के पंजीकरण और नियमों के पालन से संबंधित यह मामला लंबे समय से चल रहा है। अदालत पहले भी सरकार से कार्रवाई की रिपोर्ट मांग चुकी है और कुछ अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जाने की जानकारी भी रिकॉर्ड पर आ चुकी है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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