सीहोर: आयुष्मान भुगतान पर निजी अस्पतालों का फूटा गुस्सा, 8 अक्टूबर से इलाज बंद करने का दिया अल्टीमेटम

सीहोर। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के महीनों से अटके भुगतान, पुराने और नए पोर्टल के बीच तकनीकी उलझनों तथा अस्पतालों पर NABH की अनिवार्यता को लेकर अब निजी अस्पताल संचालकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। सीहोर जिले के निजी अस्पतालों ने शासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज बंद किया जा सकता है।
भुगतान अटका, बढ़ता गया आर्थिक दबाव
यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन (UPHDA) ने मध्य प्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर आयुष्मान योजना से जुड़े लंबित भुगतानों का तत्काल निराकरण करने की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि निजी अस्पतालों को पिछले कई महीनों से योजना के तहत किए गए उपचार का भुगतान नहीं मिल पाया है। लगातार भुगतान अटकने से अस्पतालों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन और रोजमर्रा के खर्चों पर सीधा असर पड़ रहा है।
पुराना-नया पोर्टल बना भुगतान का पेंच
अस्पताल संचालकों ने पुराने पोर्टल-1 और नए पोर्टल-2 के बीच बनी तकनीकी समस्याओं को भी बड़ा मुद्दा बताया है। एसोसिएशन के मुताबिक कई मामलों में उपचार से संबंधित दावे CPD Rejected होने के बाद उनकी राशि अटक गई है। तकनीकी खामियों और पोर्टल परिवर्तन के बीच अस्पतालों को भुगतान के लिए लगातार प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है, लेकिन लंबित राशि का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
NABH की अनिवार्यता पर तीखा विरोध
निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत NABH की अनिवार्यता पर भी कड़ा विरोध जताया है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि एक तरफ योजना के तहत किए गए उपचार का भुगतान लंबे समय से लंबित है और दूसरी तरफ अस्पतालों पर अतिरिक्त नियम और मानक लागू किए जा रहे हैं। ऐसे हालात में छोटे और मध्यम स्तर के निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं जारी रखना आर्थिक और व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
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शासन को चेतावनी, अब सिर्फ आश्वासन नहीं
एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा है कि अस्पताल संचालक लंबे समय से समस्याओं के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अब स्थिति निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यदि लंबित भुगतान की समस्या दूर नहीं हुई और NABH की अनिवार्यता पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो अस्पताल आयुष्मान मरीजों का उपचार रोकने जैसे कड़े फैसले से पीछे नहीं हटेंगे।
विधायक से मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने की मांग
एसोसिएशन के संदीप वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने विधायक सुदेश राय को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि निजी अस्पतालों की समस्याओं को मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश शासन के समक्ष तत्काल रखा जाए। अस्पताल संचालकों का कहना है कि मामला केवल अस्पतालों के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीधे तौर पर आयुष्मान योजना के लाभार्थी मरीज प्रभावित होंगे।
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8 अक्टूबर की चेतावनी से मरीजों की बढ़ी चिंता
निजी अस्पतालों ने 8 अक्टूबर की तारीख तय कर शासन को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब मामला केवल ज्ञापन और मांग तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उससे पहले लंबित भुगतान, पोर्टल की तकनीकी अड़चनों और NABH की अनिवार्यता को लेकर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आयुष्मान मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज मिलने पर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में शासन के सामने अब अस्पताल संचालकों की नाराजगी दूर करने के साथ-साथ हजारों संभावित मरीजों की स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होने से रोकने की चुनौती भी है।



















