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मप्र में 13089 प्राइमरी शिक्षकों की मेरिट कैंसिल करने पर डबल बेंच की मुहर, हाईकोर्ट ने खारिज कीं अपीलें

मप्र हाईकोर्ट की डबल बेंच ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में बोनस अंक विवाद से जुड़ी सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए संशोधित मेरिट सूची को मान्य माना। मामले में 13,089 उम्मीदवारों की मेरिट रद्द होने का मुद्दा बोनस अंक की पात्रता और गलत विकल्प चुनने से जुड़ा था।
मप्र में 13089 प्राइमरी शिक्षकों की मेरिट कैंसिल करने पर डबल बेंच की मुहर, हाईकोर्ट ने खारिज कीं अपीलें
फाइल फोटो

जबलपुर। मप्र कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के बोनस अंक विवाद में मप्र हाईकोर्ट से कई उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा है कि अब संशोधित मेरिट सूची ही मान्य होगी।

5271 ही थे पात्र, 13089 ने कह दिया ‘हां’ 

गौरतलब है कि नियम पुस्तिका के अनुसार केवल भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को ही 5% बोनस अंक मिलने थे। हालांकि, 13,089 पदों की सूची में लगभग 14,964 अभ्यर्थियों ने हां विकल्प चुनकर बोनस अंक ले लिए, जबकि अधिकृत तौर पर केवल 5,271 अभ्यर्थी ही पात्र थे। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने बिना सत्यापन अंक देने को गलत मानते हुए प्रमाणपत्र अपलोड करने का मौका दिया था और शेष का चयन निरस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ अपीलार्थियों ने दलील दी थी कि उन्होंने भूलवश हां चुना था और उन्हें बिना बोनस अंकों के सामान्य मेरिट में शामिल किया जाए।

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तीन मौके दिए फिर भी सुधार नहीं किया

सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली उम्मीदवारों की याचिका पर दिए फैसले में डिवीजन बेंच ने कहा कि उम्मीदवारों को भूल सुधार के लिए 3 अलग-अलग अवसर दिए गए थे, फिर भी सुधार नहीं किया गया। परिणाम के बाद गलती का दावा करना स्वीकार्य नहीं है। मामले में अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा व विशाल बघेल ने पैरवी की।

असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हाईकोर्ट ने दिए यथास्थिति के निर्देश 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर स्थित शासकीय बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में डिमॉन्स्ट्रेटर से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति में वरिष्ठता और नियमों की अनदेखी के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक सिंह की एकलपीठ ने मामले में राज्य शासन, सागर मेडिकल कॉलेज के डीन, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष और पदोन्नति समिति को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पदस्थ डिमॉन्स्ट्रेटर डॉ. रुचि अग्रवाल की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पदोन्नति में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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