सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी मामला: कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई

नई दिल्ली। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े टेंडर मामले में हुई है। ACB ने जैन समेत चार अन्य आरोपियों के लिए न्यायिक हिरासत की मांग अदालत के सामने रखी है। जैन ने कोर्ट में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि STP से जुड़े तकनीकी फैसलों में उन्होंने अधिकारियों पर भरोसा किया था। उनके वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
STP टेंडर में कथित गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तारी
सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने और उसकी क्षमता बढ़ाने से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित आपराधिक साजिश, अनियमितता और टेंडर की शर्तों में बदलाव के आरोपों के मामले में गिरफ्तार किया गया है। ACB ने अदालत में सत्येंद्र जैन और चार अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की है। वहीं, आरोपी अंकित श्रीवास्तव के लिए एजेंसी ने दो दिन की पुलिस हिरासत मांगी है। मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई, जहां अदालत ने दोनों अर्जियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
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'यमुना सफाई चुनावी वादे का हिस्सा था'
अदालत में सत्येंद्र जैन ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यमुना में गंदा पानी जाने से रोकने और नदी की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए और अपग्रेड किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नया STP बनाने में काफी समय लगता है, इसलिए मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया था। जैन के मुताबिक, शुरुआत में 300 MGD क्षमता का लक्ष्य रखा गया था और करीब 1546 करोड़ रुपए की परियोजना को चार पैकेज में टेंडर किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके पास आठ मंत्रालय थे और तकनीकी जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें संबंधित अधिकारियों पर भरोसा करना पड़ा।
'मुझे तकनीकी जानकारी नहीं थी'
सत्येंद्र जैन ने अदालत में कहा कि टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी फाइल उनके पास आई ही नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि 7 अगस्त को उन्हें बुलाकर ऐसे तकनीकी सवाल पूछे गए, जिनकी जानकारी उनके पास नहीं थी। जैन ने यह भी कहा कि उन्हें इस मामले में आरोपी नंबर एक बनाने की कोशिश की गई। अपनी दलील के दौरान उन्होंने 30 मई 2022 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्हें मंत्रालय से हटा दिया गया था। जैन के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और उनकी ओर से गिरफ्तारी को चुनौती दी गई।
वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सत्येंद्र जैन के वकील एन. हरिहरन ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी कानून के मुताबिक नहीं की गई और ACB की ओर से आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इसी मामले में ED चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन उस समय गिरफ्तारी नहीं हुई थी। हरिहरन के मुताबिक, जैन को पहले 3 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और पूछताछ के बाद उन्हें घर जाने दिया गया। इसके बाद 18 अगस्त को उन्हें दोबारा बुलाया गया, जहां वह जांच में सहयोग करने के लिए सुबह करीब 10 बजे ACB पहुंचे।
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27 महीने बाद गिरफ्तारी पर भी सवाल
हरिहरन ने अदालत को बताया कि जैन को जांच अधिकारी ने धारा 41A के तहत पूछताछ के लिए बुलाया था और उन्हें गिरफ्तारी की आशंका नहीं थी। जैन को कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया, बल्कि फोन कॉल के जरिए बुलाया गया था। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि केस दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई है और इससे पहले जैन को सिर्फ एक बार जांच के लिए बुलाया गया था। वकील ने टेंडर और STP के मेजरमेंट से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाए और कहा कि संबंधित टेंडर अक्टूबर 2022 में दिए गए थे, जबकि उस समय जैन दूसरे ED मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे। इन दलीलों के बाद अदालत ने ACB की न्यायिक हिरासत और अंकित श्रीवास्तव की पुलिस कस्टडी की मांग पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।














