
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑनलाइन ठगी के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की तीसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। साथ ही नकद लेन-देन के दावे को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूरे मामले को आयकर विभाग को जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।
मामला पन्ना जिले के रैपुरा थाना क्षेत्र का है जहां शिकायतकर्ता रूपचंद्र जैन ने 15.85 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर निवासी प्रभाकर मिश्रा को 13 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने कोर्ट में दावा किया कि उसने शिकायतकर्ता को नकद में रकम लौटा दी है और दोनों के बीच समझौता हो गया है इसलिए उसे जमानत दी जाए। लेकिन जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने इस दलील को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने 2 लाख रुपए से अधिक का लेन-देन नकद में करने की बात कही है जो नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए कि पूरे मामले का रिकॉर्ड आयकर विभाग को भेजा जाए ताकि संभावित कर उल्लंघन की जांच की जा सके।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और निर्दोष लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।
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आरोपी की ओर से किडनी ट्रांसप्लांट का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई थी लेकिन कोर्ट ने माना कि जेल प्रशासन द्वारा पर्याप्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि अदालत ने यह निर्देश जरूर दिया कि आरोपी को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी सावधानियां बरती जाएं और संभव हो तो उसे अलग वार्ड में रखा जाए।