Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

ऑनलाइन ठगी केस में आरोपी को राहत नहीं:हाईकोर्ट ने की बेल खारिज, आयकर विभाग को जांच के आदेश

15.85 लाख की ऑनलाइन ठगी के आरोपी की तीसरी जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। नकद लेन-देन के दावे को संदिग्ध मानते हुए कोर्ट ने आयकर विभाग को जांच के आदेश भी दिए हैं।
हाईकोर्ट ने की बेल खारिज, आयकर विभाग को जांच के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑनलाइन ठगी के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की तीसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। साथ ही नकद लेन-देन के दावे को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूरे मामले को आयकर विभाग को जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।

15.85 लाख की ठगी का मामला

मामला पन्ना जिले के रैपुरा थाना क्षेत्र का है जहां शिकायतकर्ता रूपचंद्र जैन ने 15.85 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर निवासी प्रभाकर मिश्रा को 13 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।  

नकद में पैसे लौटाने का दावा नहीं माना

सुनवाई के दौरान आरोपी ने कोर्ट में दावा किया कि उसने शिकायतकर्ता को नकद में रकम लौटा दी है और दोनों के बीच समझौता हो गया है इसलिए उसे जमानत दी जाए। लेकिन जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने इस दलील को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया।

ये भी पढ़ें: बंगाल चुनाव पर सख्त चुनाव आयोग: 5 पुलिस अफसरों के निलंबन का आदेश, निष्पक्षता पर उठे सवाल

आयकर विभाग को जांच के आदेश

कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने 2 लाख रुपए से अधिक का लेन-देन नकद में करने की बात कही है जो नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए कि पूरे मामले का रिकॉर्ड आयकर विभाग को भेजा जाए ताकि संभावित कर उल्लंघन की जांच की जा सके।

ऑनलाइन फ्रॉड गंभीर आर्थिक अपराध

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और निर्दोष लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।

ये भी पढ़ें: MP High Court: रेप केस में पैरलल जांच पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- डीजीपी देखें नर्मदापुरम पुलिस का काम

स्वास्थ्य का हवाला भी नहीं बना आधार

आरोपी की ओर से किडनी ट्रांसप्लांट का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई थी लेकिन कोर्ट ने माना कि जेल प्रशासन द्वारा पर्याप्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि अदालत ने यह निर्देश जरूर दिया कि आरोपी को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी सावधानियां बरती जाएं और संभव हो तो उसे अलग वार्ड में रखा जाए।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

Latest Posts