MP News:कॉलोनी विकास नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, अवैध कॉलोनियों पर होगी सख्ती; नगरीय प्रशासन विभाग से मिलेंगे लाइसेंस

मध्यप्रदेश सरकार कॉलोनी विकास नियमों में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब शहर, गांव और सेना की छावनी क्षेत्र में कॉलोनी विकसित करने के नियम लगभग समान होंगे। कॉलोनाइजरों को लाइसेंस जारी करने और अनुमतियां देने का अधिकार नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के पास रहेगा। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस संशोधन विधेयक को पेश कर सकती है।
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कॉलोनी विकास नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, अवैध कॉलोनियों पर होगी सख्ती; नगरीय प्रशासन विभाग से मिलेंगे लाइसेंस

अशोक गौतम, भोपाल। सरकार कॉलोनी विकास नियमों में बदलाव कर सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। नए नियमों के तहत 60 दिन के भीतर सभी अनुमतियां और लाइसेंस जारी किए जाएंगे। अवैध और अनाधिकृत कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ रुपए तक जुर्माना और 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। वहीं हाईवे से 500 मीटर तक कॉलोनी विकास पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी सभी अनुमतियां

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब कॉलोनाइजरों और बिल्डरों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 60 दिन के भीतर सभी आवश्यक अनुमतियां और लाइसेंस उपलब्ध कराए जाएंगे। एक ही लाइसेंस के आधार पर कॉलोनाइजर प्रदेश के किसी भी शहर में कॉलोनी विकसित कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रक्रियाएं आसान होंगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी। नए नियम पूरे प्रदेश में लागू किए जाएंगे।

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अवैध और अनाधिकृत कॉलोनियों पर सख्ती

सरकार ने कॉलोनियों को वैध, अवैध और अनाधिकृत श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया है। बिना अनुमति विकसित की गई कॉलोनियों को अनाधिकृत माना जाएगा, जबकि गैर-आवासीय क्षेत्रों में बनाई गई कॉलोनियां अवैध श्रेणी में आएंगी। ऐसे मामलों में 2 करोड़ रुपए तक का जुर्माना और 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य अवैध निर्माण पर रोक लगाना और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना है। लंबे समय से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

तय समय में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट

नए नियमों में उन बिल्डरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है जो अनुमति लेने के बाद वर्षों तक परियोजना शुरू नहीं करते। अब कॉलोनाइजरों को यह बताना होगा कि वे तय समयसीमा में प्रोजेक्ट कब तक पूरा करेंगे। समय पर विकास कार्य नहीं होने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई जगह अनुमति लेने के बाद जमीन खाली छोड़ दी जाती है। इससे खरीदारों और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में रहेगी सख्त निगरानी

शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त टीम बनाई जाएगी। इसमें टीएनसीपी, नगर निगम, पंचायत विभाग, तहसीलदार और पटवारी शामिल होंगे। यह टीम अवैध निर्माण की निगरानी और सूचना देने का काम करेगी। प्रस्तावित नियमों के अनुसार राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर दायरे में कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकेगी। साथ ही कॉलोनाइजरों को एप्रोच रोड, पानी, बिजली, सीवेज और सीवेज ट्रीटमेंट जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य होगा।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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