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सरकारी जमीन का मालिकाना हक नहीं दे सकती न्याय पंचायत, पाकिस्तान से आए विस्थापित की जमीन पर हाईकोर्ट का फैसला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि न्याय पंचायत सरकारी जमीन का मालिकाना हक नहीं दे सकती। ऐसा अधिकार केवल राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी को है। पाकिस्तान से विस्थापित मूलचंद पोहानी को 1959 में आवंटित 40 डिसमिल जमीन के स्वामित्व संबंधी दावे पर अदालत ने पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिलने पर अपील खारिज कर दी।
सरकारी जमीन का मालिकाना हक नहीं दे सकती न्याय पंचायत, पाकिस्तान से आए विस्थापित की जमीन पर हाईकोर्ट का फैसला
फाइल फोटो

जबलपुर। एक महत्वपूर्ण फैसले में मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि न्याय पंचायत द्वारा सरकारी जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा है कि ऐसा अधिकार केवल राजस्व विभाग के सक्षम प्राधिकारी को ही प्राप्त है। चूंकि आवेदक के पास कोई ठोस दस्तावेजी सबूत नहीं हैं, इसलिए उसके दावे को स्वीकार नही किया जा सकता। अदालत ने यह फैसला पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए मूलचंद पोहानी को वर्ष 1959 में आवंटित जमीन से संबंधित अपील पर दिया, जो वर्ष 1999 से हाईकोर्ट में लंबित थी।

दो बार बेच दी गई जमीन

सतना जिले की रघुराज नगर में सर्किट हाउस के पास रहने वाले कमलेश कुमार पटेल की ओर से यह अपील 40 डिसमिल जमीन के स्वामित्व को लेकर दाखिल की गई थी। आवेदक का कहना था कि पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से वर्ष 1947 में विस्थापित होकर आए मूलचंद पोहानी को यह जमीन वर्ष 1959 में रीवा लैंड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी कोड 1935 के तहत गठित न्याय पंचायत ने उसे दी थी। इसके लिए 500 रुपए का प्रीमियम भी लीज के रूप में दिया गया था। मूलचंद वहां पर मकान बनाकर रह रहे थे। 14 जून 1985 को वह जमीन लाजपत राय को बेची गई। 16 जनवरी 1987 को लाजपत राय ने यह जमीन याचिकाकर्ता को बेची। 14 अगस्त 1987 को याचिकाकर्ता को अतिक्रमणकारी मानकर नोटिस दिए जाने पर मामला पहले निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट में दाखिल किया गया।

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कब्जे का दावा साबित नहीं होता

मामले पर सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिलता जिससे यह साबित हो कि संबंधित व्यक्ति या उसके पूर्ववर्ती निर्धारित समय से पहले से जमीन पर काबिज थे। ऐसे में सरकार के खिलाफ प्रतिकूल कब्जे का दावा साबित नहीं होता। इस मत के साथ अदालत ने आवेदक के दावे को नाकाफी पाते हुए अपील खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से ैपैनल अधिवक्ता केके गौतम ने पैरवी की। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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