Peoples Update Special :16वें वित्त आयोग से मप्र को झटका; केंद्र घटाएगा अनुदान, 50 हजार करोड़ की हो सकती है कमी

अशोक गौतम, भोपाल। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ने की संभावना है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को केंद्रीय करों और जीएसटी के हिस्से के रूप में मिलने वाली अनुदान राशि में करीब 0.5 प्रतिशत की कमी होगी। इससे राज्य को पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपए तक केंद्रीय सहायता कम मिलने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश की विकास योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और नई घोषणाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि कर संग्रह के प्रदर्शन और आयोग के समक्ष राज्य का पक्ष अपेक्षित मजबूती से नहीं रखे जाने जैसे कारण भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
योजनाओं पर पड़ सकता है असर
प्रदेश सरकार का वर्ष 2026-27 का बजट 4.38 लाख करोड़ रुपए का है। राज्य को केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि में कमी आने की स्थिति में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर सीधा दबाव बढ़ेगा। इसका असर विशेष रूप से लोक निर्माण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग की उन योजनाओं पर पड़ सकता है, जो केंद्रीय सहायता पर अधिक निर्भर हैं।
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अतिरिक्त संधाधन जुटाने प्राथमिकताओं पर बदलाव
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय सहायता कम होने पर राज्य सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने या विकास योजनाओं की प्राथमिकताओं में बदलाव करना पड़ सकता है। सड़क, पुल, पेयजल, सिंचाई और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो सकती है। मुख्यमंत्री की विभिन्न विकास घोषणाओं और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
केंद्र सरकार पर राज्य की नजर
अब राज्य सरकार की नजर केंद्र से मिलने वाले विशेष पैकेजों और अन्य केंद्रीय योजनाओं पर रहेगी, ताकि संभावित वित्तीय कमी की भरपाई की जा सके।
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किन विभागों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
- लोक निर्माण विभाग (PWD)
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास
- जल संसाधन विभाग
- नगरीय विकास एवं आवास
- पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाएं
- ग्रामीण अधोसंरचना
यदि अनुदान घटा तो...
- विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
- नई परियोजनाओं की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं।
- राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं।
- मुख्यमंत्री की कुछ घोषणाओं के क्रियान्वयन पर असर संभव।












