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भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति नहीं, सिर्फ मिलेगी खुली जगह

मप्र के भोजशाला परिसर विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए भोजशाला परिसर में नमाज की मंजूरी नहीं दी जा रही, मुस्लिम भोजशाला साइट से सटी खुली जगह दी जाएगी।
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मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति नहीं, सिर्फ मिलेगी खुली जगह
फाइल फोटो

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि फिलहाल भोजशाला परिसर के भीतर शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं होगी, लेकिन मुस्लिम पक्ष को परिसर से सटी एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराई जाए, जहां वे दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रबंधन करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश का उद्देश्य दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती 

मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। तब तक अंतरिम व्यवस्था के तहत शुक्रवार को नमाज के लिए भोजशाला परिसर के पास अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि परिसर के भीतर नमाज पर रोक जारी रहेगी।

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संवेदनशील मामले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी निर्देश दिया कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई ढांचागत या संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाए। अदालत ने कहा कि इस चरण में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो या किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो। कोर्ट ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील भी की है, ताकि विवाद के समाधान तक सामाजिक सौहार्द कायम रहे।

हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना था सरस्वती मंदिर 

इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को अपने फैसले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना था। हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। इसी फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन दोनों समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की है। इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी, जहां सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएंगी। तब तक राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप मुस्लिम पक्ष को निर्धारित समय में अलग खुली जगह पर नमाज की सुविधा मिले और भोजशाला परिसर में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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