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तीन दिन से मानसून लापता...इटारसी में बारिश के लिए होगी विशेष नमाज

पूरे प्रदेश में छा जाने के बाद भी मानसून तीन दिन से लापता है। बारिश हो और चारों तरफ हरियाली-खुशहाली हो, इसके लिए इटारसी में विशेष दुआ की जाएगी। इटारसी की विभिन्न मस्जिदों में विशेष नमाज का वक्त मुकर्रर किया गया है। जामा मस्जिद इंतिजामिया कमेटी पांचवीं लाइन ने नमाज-ए-इस्तिस्का का आयोजन किया है।
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फाइल फोटो

ताज खान, इटारसी। इस समय जुलाई का महीना चल रहा है जिसमें भारी बारिश हुआ करते थे लेकिन इस वर्ष जुलाई मा पूरा सुखा गुजर रहा है जो अपने आप में एक बहुत बड़ी चिंता भी खड़ी कर रहा है कि अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसलों का क्या होगा साथ ही सूखे जैसे आसार बनने के कगार पर नजर आ रहे हैं इसी मुसीबत को देखते हुए इटारसी जामा मस्जिद 5 लाइन इटारसी इंतजामिया कमेटी ने यह निर्णय लिया कि वह बारिश के लिए विशेष नमाजे इस देश का का आयोजन करेंगे जो इटारसी नगर में अलग-अलग स्थान पर तीन दिन लगातार अदा की जाएगी। कमेटी प्रवक्ता जमील अहमद ने बताया कि आज दिन मंगलवार से तीन दिन जामा मस्जिद कमेटी बारिश के लिए विशेष नमाज़ नमाज-ए-इस्तिस्का का आयोजन करने जा रही है।

खुले मैदान में पढ़ी जाएगी नमाज

प्रवक्ता जमील अहमद ने बताया कि वर्तमान में बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसे हालत निर्मित हो रहे हैं। सभी लोग इस समय वर्षा नहीं होने से गर्मी से परेशान है।किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित है। इस मुसीबत से निजात के लिए मुस्लिम समाज बारिश की विशेष नमाज नमाज-ए-इस्तिस्का, जो की बारिश के लिए विशेष नमाज जो शहर के बाहर खुले मैदान में पढ़ी जाती है। कराने जा रहे है। तीनों दिन अलग-अलग स्थानों पर अदा की जाएगी।नमाज व दुआ का कार्यक्रम लगभग एक घंटा चलेगा इसमें नमाज पढ़ी जायेगी और अल्लाह से बारिश के लिए विशेष दुआएं की जायेगी।

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कहां और कब होगी नमाज

 

  • पहली नमाज 14 जुलाई, मंगलवार, भारद्वाज पेट्रोल पंप के पीछे नहर के पास वाले मैदान पर दोपहर 2:30 बजे से आयोजित की गई।  
  • दूसरी नमाज  15 जुलाई, बुधवार, बोरतलाई मार्ग बूढ़ी माता मंदिर के पीछे निजामुद्दीन मोहसिन कुरैशी की कॉलोनी वाला मैदान,दोपहर 2:30 बजे से होगी।
  •  तीसरी नमाज 16 जुलाई, गुरुवार, मदरसा इब्राहिमिया 12 बंगला के मैदान में दोपहर 2:30 बजे अदा की जाएगी।

क्या है ये विशेष नमाज का उद्देश्य 

मुस्लिम समाज में नमाज-ए-इस्तिस्का वह विशेष नमाज है जो बारिश की दुआ के लिए पढ़ी जाती है। जब किसी क्षेत्र में सूखा (अकाल) पड़ जाता है, पानी की भारी कमी हो जाती है या लंबे समय तक बारिश नहीं होती,तब अल्लाह से पानी बरसाने की गुहार लगाने के लिए यह नमाज़ सामूहिक रूप से अदा की जाती है। 'इस्तिस्क़ा' का अरबी में शाब्दिक अर्थ ही होता है पानी मांगना।

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इस नमाज से जुड़ी कुछ मुख्य बातें 

यह एक सुन्नत नमाज़ है (पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा सल्ललल्लाहों अलैह वसल्लम)से इसकी परंपरा मिलती है।

तरीका : इसमें अमूमन 2 रकात नफ़्ल नमाज जमात (सामूहिक रूप से) के साथ पढ़ी जाती है। इस नमाज के लिए अजान या इकामत नहीं कही जाती। इसे आमतौर पर मस्जिद के बजाय शहर या आबादी से बाहर किसी खुले मैदान (ईदगाह या जंगल) में जाकर पढ़ना मसनून (सुन्नत) माना जाता है।

खुत्बा और विशेष दुआ : नमाज के बाद इमाम साहब ईद की नमाज की तरह खुत्बा (भाषण/उपदेश) देते हैं।इसके बाद सभी लोग बेहद आजिज़ (विनम्रता) और रो-रोकर अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगते हैं और बारिश के लिए दुआ करते हैं। दुआ के दौरान अपनी चादरों या दुपट्ठों को उलटने-पलटने की भी रिवायत है, जो इस बात का प्रतीक है कि 'ए-अल्लाह, हमारे हालात भी इस सूखे से खुशहाली में बदल दे।' इस नमाज़ को पढ़ने से पहले लोगों को तौबा (गुनाहों की माफी) करने, सदका (दान) देने और आपस के मनमुटाव दूर करने की सलाह दी जाती है ताकि दुआ जल्दी कुबूल हो जाए। 

Tajul Khan
By Tajul Khan
नई दिल्ली
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